उत्तराखंड बदरीनाथ दान चोरी मामले में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर बरसे गणेश गोदियाल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से की हटाने की मांग,,,,

देहरादून: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे की चोरी का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। इस प्रकरण के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। देहरादून स्थित कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी के आरोपों का पलटवार करते हुए कई बड़े खुलासे किए और भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
🔴 ’आरोपी प्रमोद नौटियाल से मेरा कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं’
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया कि मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल से उनका कोई पुराना परिचय नहीं है। गोदियाल ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा:
- नौकरी की शुरुआत: प्रमोद नौटियाल की जॉइनिंग साल 2003 में हुई थी, जबकि वे खुद 2013 में बीकेटीसी के अध्यक्ष बने थे।
- भाजपा कनेक्शन का दावा: गोदियाल ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जांच में सामने आया है कि प्रमोद नौटियाल दरअसल साल 2001 में भाजपा शासनकाल के दौरान रहे बीकेटीसी अध्यक्ष का भतीजा है।
🔴 बीकेटीसी अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग, मुख्यमंत्री पर उठाए सवाल
गणेश गोदियाल ने मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी और पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान के बयानों का जिक्र करते हुए इस पूरी घटना को एक संगठित अपराध बताया। उन्होंने कहा कि राजेंद्र चौहान ने जांच में स्वीकार किया है कि वह प्रमोद नौटियाल के निर्देशों पर काम करता था और नौटियाल को सीधे बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से आदेश मिलते थे।
इस सीधे जुड़ाव को देखते हुए गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से तीखे सवाल किए:
”इतना सब कुछ होने के बाद भी मुख्यमंत्री ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को अब तक पद से क्यों नहीं हटाया? आखिर इसके पीछे कौन सी दोस्ती या मजबूरी है? मुख्यमंत्री को इस पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए या फिर जनता के सामने आकर जवाब देना चाहिए।”
🔴 हेमंत द्विवेदी के पुराने कार्यकाल पर भी उठाए गंभीर सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने हेमंत द्विवेदी पर एक और पुराना आरोप दोहराया। उन्होंने कहा कि साल 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री दिवंगत भुवन चंद्र खंडूड़ी के कार्यकाल के दौरान हेमंत द्विवेदी तराई बीज निगम के अध्यक्ष थे। उस समय भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें पद से हटाया गया था, जिसकी खबरें समाचार पत्रों में भी प्रमुखता से छपी थीं। गोदियाल ने सवाल उठाया कि ऐसे दागी इतिहास के बावजूद उन्हें बीकेटीसी जैसे सम्मानित और धार्मिक महत्व के पद पर दोबारा क्यों बैठाया गया?
🔴 बहस की खुली चुनौती
गणेश गोदियाल ने कहा कि वे इस पूरे भ्रष्टाचार के मामले पर किसी भी मंच पर बहस करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन सरकार या समिति का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति उनसे बात करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मंदिर में हुई मामूली चोरी नहीं, बल्कि उच्च स्तर से संचालित एक बड़ा घोटाला है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
