उत्तराखंड में दिखा जलवायु परिवर्तन का असर? नैनीताल के सबसे ठंडे इलाके ‘अयारपाटा’ में पहली बार मिला बर्मीज पाइथन का बच्चा,,,,

नैनीताल। पहाड़ों में लगातार बढ़ रहे तापमान का असर अब बेजुबान वन्यजीवों पर भी दिखने लगा है। नैनीताल के सबसे ठंडे क्षेत्रों में शुमार अयारपाटा में मैदानी इलाकों में पाए जाने वाले ‘बर्मीज पाइथन’ (अजगर) का बच्चा मिलने से क्षेत्र में कौतूहल और चिंता दोनों का माहौल है। वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए अजगर के बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है।
🟢 सड़क किनारे हलचल देख जुटी भीड़, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
शनिवार शाम अयारपाटा क्षेत्र में देवी कॉटेज के समीप सड़क किनारे स्थानीय लोगों ने एक सांप की हलचल देखी। अनहोनी की आशंका को देखते हुए लोगों ने तुरंत क्षेत्रीय सभासद मनोज साह जगाती को सूचित किया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सांप को सुरक्षित पकड़ लिया, जिसकी पहचान बर्मीज पाइथन के बच्चे के रूप में हुई है।

”अजगर के बच्चे को पूरी तरह सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। फिलहाल उसे नैनीताल जू (चिड़ियाघर) भेजा गया है, जहाँ से जल्द ही उसे उसके अनुकूल मैदानी क्षेत्र के जंगलों में छोड़ दिया जाएगा।”- निमिष दानू, वन विभाग कर्मी
🟢 विशेषज्ञों ने जताई चिंता बढ़ते तापमान की दस्तक या महज एक इत्तेफाक?
नैनीताल के इस ठंडे पर्वतीय क्षेत्र में बर्मीज पाइथन का मिलना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी शोध का विषय बन गया है। वन्यजीव विशेषज्ञ के.एस. सजवाण ने इस घटना पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:
- प्राकृतिक आवास: बर्मीज पाइथन सांपों की सबसे विशाल प्रजातियों में से एक है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी सक्रियता केवल भुजियाघाट, ज्योलीकोट और कालाढूंगी जैसे अपेक्षाकृत गर्म व कम ऊंचाई वाले इलाकों तक ही सीमित रही है।
- पहली बार रिकॉर्ड: नैनीताल के मुख्य शहर और विशेषकर अयारपाटा जैसे अत्यधिक ठंडे इलाके में इस प्रजाति की मौजूदगी संभवतः पहली बार आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड की गई है।
- आने के दो मुख्य कारण:
- गाड़ियों के जरिये पहुंचना: संभव है कि यह बच्चा मैदानी इलाके से आए किसी वाहन के निचले हिस्से में छिपकर यहाँ तक पहुँच गया हो।
- ग्लोबल वार्मिंग का असर: विशेषज्ञ इस बात से भी इनकार नहीं कर रहे हैं कि नैनीताल के बदलते और बढ़ते तापमान के कारण गर्म क्षेत्रों के वन्यजीव अब जीवित रहने के अनुकूल नए ठिकानों की तलाश में ऊपर की ओर रुख कर रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे सूक्ष्म जलवायु परिवर्तन (Micro-climate Change) को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
