“देश – दनिया” नेपाल में प्राकृतिक आपदा, बूढ़ी गंडकी नदी में आई विनाशकारी बाढ़, 45 मकान और 6 पुल बहे, बिहार में भी बढ़ा खतरा,,,

काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर भारी तबाही मचाई है। गोरखा जिले में रविवार तड़के करीब 4:30 बजे आई भीषण बाढ़ के कारण 45 मकान और छह पुल बूढ़ी गंडकी नदी के तेज बहाव में बह गए। इस आपदा में 10 लोगों के लापता होने की खबर है। सैलाब के कारण जलविद्युत परियोजनाओं और स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है।
🔴 भूस्खलन से जलप्रवाह रुकने के बाद अचानक आई बाढ़

चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता शांति महत के अनुसार, चुमनुब्री में लोकपा और चुमलिंग के बीच बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। इसके चलते ‘चुमके खोला’ जलधारा का प्रवाह अवरुद्ध हो गया। कुछ ही देर बाद अवरुद्ध पानी का दबाव बढ़ा और वह अचानक विनाशकारी बाढ़ के रूप में नीचे की ओर टूट पड़ा, जिसने नदी किनारे स्थित बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।
🔴 437 सुरक्षाकर्मी और चार हेलीकॉप्टर राहत-बचाव कार्य में जुटे

आपदा के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 437 जवानों के साथ चार हेलीकॉप्टरों को राहत कार्य में लगाया गया है। राहत दलों ने 9 विदेशी नागरिकों सहित 82 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इसके अतिरिक्त नेपाल पुलिस के 50 कर्मियों की एक विशेष टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि अब तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि तलाशी अभियान जारी है।
🔴 बिजली, संचार और बिजली परियोजनाएं ठप

प्रशासन के अनुसार, 341 मेगावाट की एक जलविद्युत परियोजना के मुख्य कैंप और निर्माण उपकरण बाढ़ के पानी में बह गए हैं। इसके अलावा क्षेत्र में दो टेलीफोन टावर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और बिजली के 50 खंभे गिर गए हैं, जिससे संचार व्यवस्था और विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। नदी किनारे रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी की गई है।
🔴 बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी बाढ़ की आशंका
नेपाल में आई इस बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर भी पड़ने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों के मुताबिक, बूढ़ी गंडकी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिलती है और देवघाट के पास यह नारायणी नदी बनती है। यही नदी भारत में प्रवेश कर गंडक के नाम से जानी जाती है और अंततः गंगा में मिलती है। जलस्तर में अचानक हुई इस वृद्धि के चलते बिहार के निचले व तटीय जिलों में बाढ़ का अलर्ट बढ़ गया है।
