पेट्रोल – डीजल के बल्क यूजर्स पर शिकंजा, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में ईंधन खरीदने पर 90 दिनों की रोक,,,

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने के बीच केंद्र सरकार ने देश में ईंधन की जमाखोरी और किल्लत को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत, अब इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल (थोक) ग्राहक सीधे पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में पेट्रोल और डीजल नहीं खरीद सकेंगे। यह प्रतिबंध शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू किया गया है।
🟢 क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक बाजार में तेल की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई थी। आम जनता को इस महंगाई से बचाने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने रिटेल (खुदरा) कीमतों को स्थिर रखा, जबकि बल्क (थोक) यूजर्स के लिए मार्केट प्राइस लागू रखा।
इस कारण खुदरा और थोक कीमतों में एक बड़ा अंतर पैदा हो गया। उदाहरण के लिए, दिल्ली में रिटेल पंप पर डीजल जहां ₹95.20 प्रति लीटर है, वहीं थोक में इसकी कीमत ₹134.50 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इस ₹39 से अधिक के अंतर का फायदा उठाने के लिए टेलीकॉम टावर, बिजली उत्पादन इकाइयों और अन्य उद्योगों जैसे बल्क यूजर्स ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए रिटेल पेट्रोल पंपों का रुख करना शुरू कर दिया, जिससे कुछ इलाकों में अचानक डीजल की मांग बेतहाशा बढ़ गई।
🔴 नए आदेश के मुख्य बिंदु और पाबंदियां
सरकार द्वारा जारी ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के ज़रिए सप्लाई का टेम्पररी रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026’ के तहत निम्नलिखित कड़े नियम तय किए गए हैं:
- बल्क खरीद पर पूरी रोक: इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्राहकों को अब पेट्रोल पंपों के बजाय अनिवार्य रूप से अपने खुद के ‘बल्क सेल पॉइंट’ (थोक बिक्री केंद्रों) से ही ईंधन लेना होगा।
- प्रतिदिन की सीमा तय: पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) द्वारा प्रमाणित कंटेनरों तक ही सीमित किया गया है। इसके तहत कोई भी ग्राहक या वाहन हर दिन अधिकतम 200 लीटर तक ही डीजल खरीद सकेगा।
- री-सेल पर पाबंदी: खुदरा आउटलेट से खरीदे गए इस डीजल को किसी भी स्थिति में दोबारा बेचा (Re-sell) नहीं जा सकता।
- 90 दिनों की अवधि: यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों तक प्रभावी रहेगी, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सरकार आगे बढ़ा सकती है।
🟢 आम जनता को किल्लत से बचाना है मकसद
मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, थोक उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा केंद्रों से की जा रही अत्यधिक खरीदारी के कारण आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कमी होने और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सेवाओं में रुकावट आने की आशंका पैदा हो गई थी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में पेट्रोल-डीजल की ‘समान उपलब्धता’ सुनिश्चित करना और आम आदमी को बिना किसी बाधा के ईंधन की आपूर्ति बनाए रखना है।
🔴 कड़े ऐक्शन की तैयारी: लागू होगा आवश्यक वस्तु अधिनियम
सरकार ने साफ किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान होगा। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी और अवैध रूप से आपूर्ति को डाइवर्ट करने वालों पर कड़ी निगरानी रखें। हालांकि, सरकार विशेष परिस्थितियों में किसी क्षेत्र या उपभोक्ता श्रेणी को इस नियम से छूट देने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखती है।
