उत्तर भारत में तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़कर बनेगा नया कॉरिडोर, हरिद्वार-ऋषिकेश का सफर होगा आसान, आगरा से 4 और जयपुर से लगेंगे सिर्फ 6 घंटे,,,

देहरादून/लखनऊ। उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान से उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ व पर्यटन स्थलों—हरिद्वार और ऋषिकेश—जाने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए सफर आने वाले समय में बेहद सुगम और तीव्र होने जा रहा है। सरकार गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार और विभिन्न प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक वृहद इंटर-स्टेट सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना पर कार्य कर रही है। इस एकीकृत नेटवर्क के धरातल पर उतरने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी; आगरा से हरिद्वार की दूरी 7-8 घंटे से घटकर मात्र 4 घंटे और जयपुर से हरिद्वार का सफर 10-11 घंटे से कम होकर लगभग 6 घंटे में पूरा हो सकेगा।
🟢 तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़कर बनेगा नया कॉरिडोर

इस व्यापक परियोजना का उद्देश्य अलग-थलग सड़कों के बजाय गंगा एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक सुगम मार्ग तैयार करना है। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- गंगा एक्सप्रेसवे का मेरठ-हरिद्वार विस्तार: योजना के तहत गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे हरिद्वार तक लगभग 146 किलोमीटर विस्तारित करने का प्रस्ताव है, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश सीधे उत्तराखंड से जुड़ जाएगा।
- गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे (जेवर एयरपोर्ट लिंक): जेवर एयरपोर्ट के समीप लगभग 74.5 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव है। इसके जरिए यमुना एक्सप्रेसवे को बुलंदशहर क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इससे आगरा और मथुरा से आने वाले वाहन सीधे हरिद्वार की ओर निकल सकेंगे।
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ाव: यमुना एक्सप्रेसवे को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक के माध्यम से राजस्थान और हरियाणा की ओर से आने वाले वाहनों को भी हरिद्वार के लिए सीधा और हाई-स्पीड विकल्प मिलेगा।
🟢 लखनऊ से हरिद्वार के लिए कनेक्टिंग रूट का उपयोग

योजना के अनुसार लखनऊ से हरिद्वार के लिए कोई पृथक अथवा सीधा एक्सप्रेसवे निर्मित नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर राजधानी लखनऊ से जाने वाले वाहन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा पहुंचकर यमुना एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के माध्यम से गंगा एक्सप्रेसवे होते हुए हरिद्वार पहुंच सकेंगे।
🟢 पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय व्यापार को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान के बीच इस निर्बाध कनेक्टिविटी से धार्मिक पर्यटन और वीकेंड ट्रैवल को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही अंतरराज्यीय माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) में लगने वाले समय और लागत में भारी कमी आएगी। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के किनारे होटल, रेस्तरां, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे सेवा क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से स्थानीय रोजगार और व्यापार को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है।
