उत्तराखंड हल्द्वानी का ऐतिहासिक एमबी डिग्री कॉलेज, संघर्षों से शुरू होकर आज बना प्रदेश का सबसे बड़ा राजकीय संस्थान,,,,

हल्द्वानी। कुमाऊं का प्रवेश द्वार हल्द्वानी मंडल में कारोबार, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में हमेशा से अग्र पंक्ति में रहा है। यहां के ऐतिहासिक किस्सों और बाजार की गलियों की अपनी एक खास कहानी है। आज के दौर में शिक्षा प्राप्त करना भले ही सुलभ हो गया है और जगह-जगह स्कूल-कॉलेज उपलब्ध हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
🟢 शिक्षा की अलख जगाने वाले लाला बाबू राम और एमबी कॉलेज की स्थापना
उस दौर में उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को इलाहाबाद और बनारस जाना पड़ता था, जो सामान्य परिवारों के लिए असंभव और खर्चीला था। इन कठिनाइयों के बीच कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में व्यवसायी लाला बाबू राम ने स्थानीय लोगों के आग्रह पर शिक्षा की अलख जलाई। व्यवसायी मोतीराम बाबूराम के नाम से संचालित ‘एमबी एजुकेशनल ट्रस्ट’ के माध्यम से वर्ष 1960 में एमबी डिग्री कॉलेज की नींव रखी गई।
यह हल्द्वानी और कुमाऊं के भाबर (पर्वतीय इलाके की तलहटी) क्षेत्र का पहला उच्च शिक्षा संस्थान था। इसे एक निजी स्नातक कॉलेज के रूप में शुरू किया गया था, जो आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था। वर्ष 1961 में बीए पाठ्यक्रम के साथ इसके पहले बैच की शुरुआत हुई और उस समय यहां प्रातःकालीन कक्षाएं संचालित होती थीं।
🟢 अध्यापकों का जुनून और कॉलेज का सफर

पत्रकार आनंद बल्लभ उप्रेती की पुस्तक “हल्द्वानी स्मृतियों के झरोखे से” में उल्लेख मिलता है कि शुरुआती दौर में यहां नौकरीपेशा लोग भी उच्च शिक्षा ग्रहण करते थे। उस समय अध्यापकों में ऐसा जुनून था कि वे रविवार और अन्य छुट्टियों के दिन भी कक्षाएं लिया करते थे। बाबूलाल गोयल इस कॉलेज के पहले प्राचार्य थे।
🟢 राजकीयकरण से लेकर विशाल स्वरूप तक
- संबद्धता और राजकीयकरण: वर्ष 1973 में कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद, 1974 में एमबी डिग्री कॉलेज इससे संबद्ध हो गया। इसके पश्चात वर्ष 1982 में इसका राजकीयकरण हुआ और यह एक सरकारी कॉलेज के रूप में सामने आया।
- छात्र संख्या और परिसर: करीब पांच एकड़ में फैला यह कॉलेज 66 वर्ष का सफर पूरा कर चुका है। वर्तमान में इस संस्थान में 14 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
- क्षेत्र का सबसे बड़ा संस्थान: भारी छात्र संख्या के कारण भाबर क्षेत्र का यह पहला कॉलेज अब प्रदेश का सबसे बड़ा राजकीय संस्थान बनकर उभरा है। वर्तमान में यहां हल्द्वानी और नैनीताल जिले के अलावा सीमांत जिले पिथौरागढ़ तक के छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं।
