उत्तराखंड नैनीताल हाईकोर्ट का सख्त रुख, लोकायुक्त नियुक्ति मामले में सरकार को चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश,,,

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।
🟢 नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान, सरकार ने मांगा समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पूर्व के आदेश के क्रम में रिपोर्ट पेश करते हुए बताया गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है। सरकार की तरफ से कहा गया कि समिति के समक्ष लोकायुक्त और उसके सदस्यों का पैनल तैयार कर रखा जाएगा, जिसके लिए कोर्ट से चार सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया। अदालत ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए चार सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
🔴 वर्ष 2013 से खाली पड़ा है पद
हल्द्वानी निवासी रवि शंकर जोशी द्वारा दायर इस जनहित याचिका में यह मुख्य रूप से उठाया गया था कि उत्तराखंड में वर्ष 2013 से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि एक तरफ जहां लोकायुक्त संस्थान के नाम पर सालाना दो से तीन करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में कोई भी ऐसी स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं है जो बिना शासन की पूर्वानुमति के राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर सके।
याचिका में यह भी कहा गया कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच व्यवस्था के लिए शीघ्र लोकायुक्त की नियुक्ति की जाए, ताकि राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लग सके और अदालतों पर बढ़ रहे मुकदमों के बोझ को भी कम किया जा सके।
