उत्तराखंड हरिद्वार जिलाधिकारी ने ज्वालापुर, कनखल के प्राथमिक विद्यालयों का किया औचक निरीक्षण, 12 ड्यूटी पर तैनात शिक्षक मिले अनुपस्थित,,,

हरिद्वार। हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने मंगलवार को ज्वालापुर और कनखल क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों (प्राथमिक विद्यालय संख्या-18, कनखल संख्या-3 और ज्वालापुर) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में पठन-पाठन, मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता और साफ-सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।
🔴 12 शिक्षक मिले नदारद, गुणवत्ता में लापरवाही पर नाराजगी

निरीक्षण के दौरान प्राथमिक विद्यालय में 334 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष मात्र 204 उपस्थित पाए गए, वहीं 12 शिक्षक विद्यालय में अनुपस्थित मिले (जिनमें से एक शिक्षक 4 फरवरी 2025 से अनुपस्थित चल रहे थे)। इस पर प्रधान अध्यापक सरिता रानी चौधरी को उपस्थिति और संवेदनशीलता से कार्य करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी या लापरवाही को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए सख्त चेतावनी दी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में बच्चों को स्वच्छ, पौष्टिक और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही भोजन उपलब्ध कराया जाए।
🟢 अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक शिक्षण संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए उन्होंने शिक्षकों को समय-समय पर अभिभावकों के साथ बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों की उपस्थिति, प्रगति और शिक्षा में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है।
🔴 जर्जर भवनों की मरम्मत और सीएसआर के माध्यम से सुधार के निर्देश
जिलाधिकारी ने चिह्नित कमियों को दूर करने के लिए प्राथमिकताओं के आधार पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने विद्यालय भवनों की मरम्मत के लिए सीएसआर (Corporate Social Responsibility) के माध्यम से कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं से संवाद भी किया और कक्षाओं में बच्चों की पठन-पाठन गतिविधियों को परखा।
