उत्तराखंड में अगले छह महीने के लिए एस्मा (ESMA) लागू, राज्यभर में कर्मचारी संगठनों की हड़तालों पर पूर्ण प्रतिबंध,,,

देहरादून: उत्तराखंड सरटीकार ने राज्य के अधीन सेवाओं में अगले छह महीने के लिए हड़ताल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार चल रहे प्रदर्शनों और आंदोलनों के बीच सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। राज्य में उत्तर प्रदेश आवश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) यथावत लागू करते हुए इसकी विधिवत अधिसूचना जारी कर दी गई है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
🔴 हड़ताल और आंदोलन की वजह
इन दिनों राज्य के कई कर्मचारी संगठन वेतनमान में बढ़ोतरी, पदोन्नति और सेवा शर्तों जैसी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलित हैं। संगठनों की यह नाराज़गी अब प्रत्यक्ष रूप से आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है, जिससे सरकार को आम जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होने का अंदेशा था।
🔴 चारधाम यात्रा और मानसून को लेकर संवेदनशीलता
वर्तमान समय में प्रदेश में पवित्र चारधाम यात्रा चल रही है और मानसून भी पूरी तरह सक्रिय है, जिसके कारण आपदा प्रबंधन के लिए लगातार उच्च सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ऐसे संवेदनशील दौर में स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सेवाएं ठप होने से आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था। इसी संभावित खतरे के मद्देनजर एहतियातन यह प्रतिबंध लगाया गया है।
🔴 सख्त कार्रवाई के निर्देश
जारी अधिसूचना के अनुसार, आगामी छह महीने तक राज्य के अधीन आने वाली किसी भी सेवा में हड़ताल पूरी तरह से वर्जित रहेगी। यदि इसके बावजूद कोई कर्मचारी संगठन हड़ताल या कार्य बहिष्कार करता है, तो उसके विरुद्ध ESMA के सुसंगत प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🔴 क्या है ESMA?
आवश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) एक ऐसा कानूनी हथियार है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आपातकालीन और आवश्यक सरकारी सेवाएं किसी भी परिस्थिति में बाधित न हों। इस कानून के तहत सरकार को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने का विशेष अधिकार प्राप्त है। इस कानून की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है। केंद्रीय ESMA सबसे पहले वर्ष 1968 में लागू किया गया था, जबकि उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश का ESMA अधिनियम प्रभावी है।
