उत्तराखंड में 29 जून से भारी बारिश का ‘यलो अलर्ट’, मौसम विभाग ने चारधाम यात्रियों और नागरिकों के लिए जारी की गाइडलाइन,,,

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की आधिकारिक दस्तक से ठीक पहले मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने 28 जून से 2 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। वहीं, 29 जून से 11 जुलाई के बीच प्रदेश के कई जिलों में मूसलाधार बारिश की आशंका को देखते हुए ‘यलो अलर्ट’ जारी किया गया है। मौसम विभाग और प्रशासन ने चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
🔴 चार जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 29 जून से 1 जुलाई के बीच कुमाऊं मंडल के चार प्रमुख जिलों—पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। इसके अलावा, अन्य पर्वतीय जिलों में मध्यम और मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है। इससे पूर्व, 27 और 28 जून को पर्वतीय क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आकाशीय बिजली चमकने और गर्जन के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
🟢 मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल का बयान
मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि अगले दो दिनों तक प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की स्थिति बनी रहेगी। हालांकि, 28 जून के बाद बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि 28 जून को कुमाऊं मंडल के अधिकांश क्षेत्रों और गढ़वाल मंडल के कुछ हिस्सों में बारिश होगी, जिसके बाद 29 जून से 1 जुलाई के दौरान पूरे उत्तराखंड में बारिश का दायरा और तीव्रता बढ़ जाएगी।
🟢 यात्रा गाइड और महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवायजरी
लगातार बारिश के चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (Landslide), चट्टानें गिरने, सड़कें बाधित होने और नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की संभावना बनी रहती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने नागरिकों के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- आकाशीय बिजली के दौरान: गर्जन और बिजली चमकने के समय घरों के अंदर रहें, खिड़कियां व दरवाजे बंद रखें। बिजली से चलने वाले उपकरणों और खुले स्थानों से पूरी दूरी बनाए रखें।
- तेज हवाओं से बचाव: अंधड़ के दौरान पेड़ों और कमजोर बुनियादी ढांचों/होर्डिंग्स के नीचे खड़े न हों।
- पहाड़ी मार्गों पर सतर्कता: भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें। वाहन चालक पहाड़ी रास्तों पर बेहद धीमी गति और सतर्कता के साथ सफर करें।
- नदी-नालों से दूरी: छोटी नदियों और बरसाती नालों के आसपास रहने वाले लोग विशेष सावधानी बरतें और जलस्तर बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
🟢 प्रशासन ने की सतर्क रहने की अपील
संभावित खराब मौसम को देखते हुए शासन-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक सफर करने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन व आपदा प्रबंधन के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।
