उत्तराखंड हरिद्वार अर्धकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल व्यवस्था हेतु साढ़े आठ करोड़ की योजना, जल निगम ने शुरू की व्यापक तैयारियां,,,

हरिद्वार। उत्तराखंड में आगामी अर्धकुंभ मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धामी सरकार ने पेयजल व्यवस्था को लेकर कमर कस ली है। मेले के दौरान स्वच्छ और निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड जल निगम द्वारा ₹8.50 करोड़ की लागत से एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर उस पर काम शुरू कर दिया गया है। इस भव्य धार्मिक आयोजन में आने वाले साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं को मुख्य घाटों, अखाड़ों और शिविरों में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
🟢 विभिन्न सेक्टरों में बिछेगा अस्थायी पाइपलाइनों का जाल
मेला क्षेत्र की संवेदनशीलता और भारी भीड़ को देखते हुए जल निगम स्थायी व्यवस्था के साथ-साथ बड़े पैमाने पर अस्थायी बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। इसके तहत मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों में अलग-अलग व्यास की 10,000 मीटर से अधिक लंबी अस्थायी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। साथ ही हजारों की संख्या में स्टैंड पोस्ट (नल) और पीवीसी (PVC) टैंक स्थापित किए जाएंगे।
🟢 बजट का सेक्टरवार विवरण:
जल निगम ने मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में बांटकर बजट आवंटित किया है, जो इस प्रकार है:
- बैरागी कैंप सेक्टर: ₹3.67 करोड़
- गौरी-शंकर द्वीप क्षेत्र: ₹3.68 करोड़
- मायापुर, मनसा देवी और हर की पैड़ी सेक्टर: ₹1.12 करोड़
🟢 वॉटर कूलर और अग्नि सुरक्षा के विशेष इंतजाम
भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और मुख्य मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त संख्या में वॉटर कूलर लगाए जाएंगे। पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति या आगजनी की घटना से तुरंत निपटने के लिए मेला क्षेत्र में फायर हाइड्रेंट भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे पानी के टैंकरों और दमकल गाड़ियों को त्वरित बैकअप मिल सकेगा।
🟢 24 घंटे तैनात रहेगी मेंटेनेंस गैंग
मेला अवधि के दौरान पेयजल व्यवस्था में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए, इसके लिए जल निगम द्वारा तीन शिफ्टों (24 घंटे) में फिटर, जूनियर फिटर और बेलदारों की विशेष रखरखाव (रखरखाव गैंग) तैनात की जाएगी। यह टीम किसी भी तकनीकी खराबी या लीकेज को तुरंत ठीक करेगी। अर्धकुंभ मेला समाप्त होने के बाद इन सभी अस्थायी व्यवस्थाओं को सुरक्षित हटा लिया जाएगा।
🟢 अर्थव्यवस्था और राज्य की छवि को मिलेगा बढ़ावा
प्रशासन के मुताबिक, अर्धकुंभ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह उत्तराखंड की छवि और अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा अवसर है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आमद से स्थानीय होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और व्यापारिक गतिविधियों को भारी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढाँचे और भीड़ प्रबंधन को मजबूत कर देश-दुनिया को एक सुरक्षित, स्वच्छ और अविस्मरणीय कुंभ का अनुभव कराना है।
