उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: 11 पहाड़ी जिलों के 275 गांवों में लागू होगी ‘स्वैच्छिक-आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति’, पलायन रोकथाम और कृषि बढ़ावे की कवायद,,,,

देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी जोत और पलायन की गंभीर समस्या से निपटने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 11 पहाड़ी जिलों में कृषि और किसानों की तस्वीर बदलने के उद्देश्य से ‘स्वैच्छिक-आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति’ को लागू कर दिया गया है। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब शासन स्तर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस नीति के तहत आगामी पांच वर्षों में 275 गांवों का कायाकल्प करने का लक्ष्य रखा गया है।
🟢 बिखरी जोत और पलायन पर लगेगी रोक
भौगोलिक विषमताओं से घिरे उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कृषि भूमि का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग न हो पाना और जमीन का छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरा होना एक बड़ी चुनौती रहा है। इसके साथ ही भू-अभिलेखों का उचित बंदोबस्त न होने से खेती से आजीविका चलाना कठिन हो गया था, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजगार के लिए मजबूरन पलायन करना पड़ रहा था। सरकार का मानना है कि इस समस्या का एकमात्र समाधान चकबंदी ही है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नई प्रोत्साहन नीति लाई गई है, जिसके तहत चकबंदी के लिए आगे आने वाले गांवों के किसानों को सरकार द्वारा विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।
🟢 5 साल का रोडमैप और नीति के मुख्य बिंदु
राजस्व सचिव डॉ. एस.एन. पांडेय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में प्रशासनिक पहल शुरू कर दी गई है। योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- चरणबद्ध लक्ष्य: प्रत्येक पहाड़ी जिले में स्वैच्छिक-आंशिक चकबंदी के लिए 10-10 गांवों को सूचीबद्ध किया जाएगा। पहले चरण में हर साल 11 जिलों के 5-5 गांवों में चकबंदी की जाएगी। इस प्रकार 5 वर्षों में कुल 275 गांवों को इसके तहत कवर किया जाएगा।
- सहमति और सहभागिता: गांवों के चिह्नीकरण के दौरान खातेदारों (किसानों) को पूरी तरह विश्वास में लिया जाएगा। योजना के लिए चिह्नित गांवों में न्यूनतम 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल या अलग-अलग 25 खातेदारों की आपसी सहमति अनिवार्य होगी।
- पारदर्शिता और योजना: चकबंदी के प्रस्तावों में भूमि पर मौजूद परिसंपत्तियों, वृक्षों और अन्य अवसंरचनाओं का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। भूस्वामियों की सहमति से ही चक निर्माण और चकबंदी योजना का अंतिम प्रस्ताव तैयार होगा।
- निगरानी और समीक्षा: योजना की कड़ाई से मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। साथ ही, मौके पर आने वाली समस्याओं और विवादों के त्वरित निवारण के लिए राजस्व अधिकारियों की एक टीम तैनात रहेगी।
🟢 किसानों को मिलेंगी विशेष सुविधाएं
शासन के अनुसार, जिन गांवों में किसान आपसी सहमति से स्वैच्छिक चकबंदी के लिए तैयार होंगे, वहां सरकार बुनियादी ढांचे का विकास करेगी। इन गांवों को सड़क कनेक्टिविटी, सिंचाई के साधन, आधुनिक कृषि उपकरण और अन्य सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता के आधार पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को एक लाभदायक उद्यम बनाया जा सके।
