उत्तराखंड उच्च हिमालय में चढ़ता पारा, तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर, गोरी, काली और धौलीगंगा नदियों में बढ़ा जलस्तर,,,,,

पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज और बढ़ती तपिश ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से लगातार खिल रही चटख धूप के कारण क्षेत्र के मुख्य ग्लेशियरों से रिकॉर्ड मात्रा में बर्फ पिघल रही है। इसका सीधा असर सीमांत की प्रमुख नदियों पर देखने को मिल रहा है, जिनका जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण वे उफान पर आ गई हैं।
🔴 सामान्य से अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा तापमान
मौसम विभाग और स्थानीय केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, उच्च हिमालयी और ट्रांस-हिमालयन क्षेत्रों में इन दिनों अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। अमूमन इस मौसम में यहाँ इतना अधिक तापमान नहीं रहता है। इस अप्रत्याशित तपिश का सीधा और व्यापक असर मिलम, पंचाचूली और नामिक जैसे बड़े व ऐतिहासिक ग्लेशियरों पर पड़ रहा है।
🔴 उफान पर सीमांत की जीवनदायिनी नदियाँ
हिमनदों के तीव्र गति से पिघलने के कारण मुनस्यारी और धारचूला तहसीलों की घाटियों में जल-उछाल की स्थिति बनी हुई है:
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- गोरी और मदकानी नदी: मुनस्यारी तहसील के मल्ला जोहार स्थित मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गोरी नदी इस समय पूरे उफान पर है। इसके साथ ही, रलाम ग्लेशियर से आने वाली रलाम गाड़ और मदकानी नदी के जलस्तर में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- काली नदी और कुटी यांग्ती: धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र भी इस स्थिति से अछूते नहीं हैं। लिपुलेख के पास कालापानी से उद्गम होने वाली काली नदी और व्यास घाटी के कुटी यांग्ती क्षेत्र के जलस्रोतों में पानी का स्तर काफी ऊपर आ गया है।
- पूर्वी धौलीगंगा व रामगंगा: दारमा घाटी के ग्लेशियरों से निकलने वाली पूर्वी धौलीगंगा नदी पूरे वेग के साथ बहते हुए तवाघाट में काली नदी में समाहित हो रही है। ठीक ऐसी ही स्थिति नामिक ग्लेशियर से निकलने वाली पूर्वी रामगंगा नदी की भी बनी हुई है।
🔴 घाटियों में अलर्ट जैसी स्थिति
जोहार, व्यास और दारमा घाटी की इन सभी प्रमुख नदियों के तटीय और मैदानी संगम स्थलों पर मटमैले पानी का तेज प्रवाह साफ देखा जा सकता है, जो ग्लेशियरों के तेजी से गलने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रशासन और स्थानीय निवासी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
