उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, चारधाम और आदि कैलाश यात्रा के लिए नई SOP जारी, बिना फिटनेस और माइक्रोचिप नहीं चलेंगे घोड़ा-खच्चर, क्रूरता पर होगी FIR,,,,

देहरादून। राज्य सरकार ने चारधाम और आदि कैलाश यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चर जैसे अश्ववंशीय पशुओं के कल्याण और संरक्षण के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। अपर सचिव संतोष बडोनी द्वारा निदेशक पशुपालन को भेजे गए शासनादेश के अनुसार, यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसका मुख्य उद्देश्य बेजुबान पशुओं पर होने वाली क्रूरता को रोकना और यात्रा मार्गों पर पर्यावरण व सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना है।
🟢 तय हुई पशुओं की संख्या, रूट के हिसाब से मिलेगी अनुमति
माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शासन ने यात्रा मार्गों की वहन क्षमता (Carrying Capacity) तय कर दी है। अब निर्धारित संख्या से अधिक पशुओं का संचालन नहीं हो सकेगा:
- केदारनाथ यात्रा मार्ग: अधिकतम 5,000 अश्ववंशीय पशु
- हेमकुण्ड साहिब मार्ग: लगभग 1,050 अश्ववंशीय पशु
- यमुनोत्री यात्रा मार्ग: लगभग 595 अश्ववंशीय पशु
🔴 बिना रजिस्ट्रेशन और स्वास्थ्य जांच के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध
नई SOP के तहत यात्रा मार्गों पर चलने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों का जिला पंचायत और जिला प्रशासन के माध्यम से वार्षिक पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण से पहले पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स बीमारी की जांच, इयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग की जाएगी। स्वास्थ्य प्रमाण पत्र केवल 45 दिनों के लिए वैध होगा, जिसके बाद दोबारा फिटनेस टेस्ट कराना होगा। अपंजीकृत पशुओं के संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी।
🟢 पशु कल्याण प्राथमिकता: हर 1 किमी पर गुनगुना पानी और सीसीटीवी से निगरानी
पशुओं को राहत देने के लिए हर एक किलोमीटर पर पशु स्वामियों को स्वच्छ व गुनगुने पानी, चारा और इलेक्ट्रोलाइट की व्यवस्था करनी होगी। पानी के ट्रफ और संवेदनशील रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिसकी निगरानी के लिए विशेष अधिकारी और पशु चिकित्सक तैनात होंगे। पशुओं को घाव से बचाने के लिए हल्की और वॉटरप्रूफ काठियों (Saddles) के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
🔴 नियम तोड़े तो लाइसेंस होगा निरस्त, दर्ज होगी FIR
नई व्यवस्था में पशुओं पर क्षमता से अधिक भार लादने, बीमार या घायल पशुओं से काम कराने, बिना टोकन संचालन, पशुओं को पीटने, तेज दौड़ाने या माइक्रोचिप से छेड़छाड़ करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ और ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के तहत दोषी पाए जाने पर पशुस्वामी का लाइसेंस निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।
🟢 एक मालिक को केवल दो पशुओं की अनुमति, रात में संचालन बंद
- सीमित संचालन: एक पशुस्वामी अधिकतम दो पशुओं का संचालन कर सकेगा और प्रतिदिन केवल एक ही टोकन जारी होगा।
- समय सीमा: सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले (रात के समय) पशुओं का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। टोकन केवल सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही मिलेंगे।
- मौसम का प्रतिबंध: खराब मौसम, भारी बारिश, ओलावृष्टि या बर्फबारी की स्थिति में पशुओं का संचालन तुरंत रोक दिया जाएगा।
- हॉकर अनिवार्य: हर पशु के साथ एक संचालक (हॉकर) का होना जरूरी है। लावारिस पाए जाने वाले पशुओं को प्रशासन तुरंत जब्त कर लेगा।
🟢 24 घंटे चिकित्सा सुविधा और ‘म्यूल टास्क फोर्स’ का गठन
यात्रा मार्गों पर स्थायी और अस्थायी पशु चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। बीमार और लावारिस पशुओं के इलाज के लिए 24×7 इन्फर्मरी (Infirmary) सुविधा उपलब्ध रहेगी। यदि यात्रा मार्ग पर किसी पशु की मृत्यु होती है, तो वैज्ञानिक विधि से शव का निस्तारण होगा और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए ‘म्यूल टास्क फोर्स’ (Mule Task Force) का गठन किया गया है, जो अतिरिक्त चेक पोस्टों और रात्रि गश्त के माध्यम से निगरानी रखेगी। पशु क्रूरता की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक स्वतंत्र 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की जा रही है। शासन ने सभी संबंधित विभागों को इस एसओपी का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
