उत्तराखंड देहरादून के हर्रावाला में आरटीओ बाइक स्क्वायड के उप निरीक्षक निलंबित ‘वसूली’ के आरोपों के बीच दुकान में बंद हुए थे दारोगा,,,

देहरादून। राजधानी के हर्रावाला क्षेत्र में सोमवार को हुए एक नाटकीय घटनाक्रम ने उत्तराखंड परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“परिवहन विभाग का ‘बाइक स्क्वायड’ विवादों के घेरे में, हर्रावाला कांड ने खोली सड़क पर चल रहे ‘वसूली सिस्टम’ की परतें”
बाइक स्क्वायड के उप निरीक्षक शशिकांत तेंगोवाल को ‘अवैध वसूली’ के आरोपों के बीच विभाग ने निलंबित तो कर दिया है, लेकिन इस घटना ने विभाग के भीतर व्याप्त कथित ‘वसूली तंत्र’ को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है।
दुकान के भीतर कैद दारोगा: क्या था पूरा घटनाक्रम?
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को उप निरीक्षक शशिकांत हर्रावाला क्षेत्र में गश्त पर थे। आरोप है कि ट्रांसपोर्टरों ने उन्हें ‘रस मलाई’ खाने के बहाने एक दुकान के भीतर बुलाया और बाहर से शटर गिरा दिया। करीब दो घंटे तक वर्दीधारी अधिकारी दुकान के भीतर फंसे रहे, जबकि बाहर ट्रांसपोर्टरों की भारी भीड़ जमा रही।
शटर खुलने के बाद इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें ट्रांसपोर्टर दारोगा पर लेनदेन और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाते सुनाई दे रहे हैं। मामला तूल पकड़ता देख विभाग ने आनन-फानन में उप निरीक्षक को निलंबित कर मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी है।
‘बॉडी वॉर्म कैमरे’ और पारदर्शिता पर सवाल
यह मामला करीब डेढ़ वर्ष पूर्व हरिद्वार में हुए इसी तरह के एक प्रकरण की याद दिलाता है। उस समय विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फील्ड कर्मचारियों के लिए बॉडी वॉर्म कैमरे अनिवार्य करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कार्रवाई के दौरान कैमरा चालू था? यदि हां, तो उसकी फुटेज कहां है? और यदि कैमरा बंद था, तो क्या विभाग के पुराने निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?
विभागीय पक्ष ‘ड्यूटी के बाद गए थे दुकान’
आरटीओ प्रवर्तन डॉ. अनीता चमोला का कहना है कि उक्त दारोगा ड्यूटी समाप्त करने के बाद दुकान पर गए थे और वीडियो में किसी प्रकार की नकदी का उल्लेख या प्रमाण नहीं दिख रहा है। हालांकि, अधिकारी का दुकान के भीतर बंद होना और ट्रांसपोर्टरों का आक्रोश विभाग की कार्यशैली को शक के घेरे में खड़ा कर रहा है।
प्रवर्तन की ‘चयनात्मक’ कार्रवाई के आरोप
इस घटना के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि विभाग की सख्ती केवल शहर के भीतर तक सीमित है। आरोप हैं कि:
- रायपुर, प्रेमनगर और राजपुर जैसे आउटर इलाकों में खनन सामग्री से लदे डंपर प्रतिबंधित समय में भी बेरोकटोक दौड़ रहे हैं।
- कार्रवाई केवल उन्हीं वाहनों पर होती है जहां ‘सेटिंग’ का अभाव होता है।
कर्मचारी या पूरा तंत्र दोषी?
शशिकांत तेंगोवाल का निलंबन विभाग के लिए एक तात्कालिक समाधान हो सकता है, लेकिन इस घटना ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। क्या यह केवल एक व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का मामला है, या फिर यह उस संगठित नेटवर्क का हिस्सा है जिसकी शिकायतें ट्रांसपोर्टर लंबे समय से करते आ रहे हैं? जनता के बीच अब यही सवाल चर्चा का केंद्र है कि यदि वीडियो वायरल न होता, तो क्या विभाग कोई कार्रवाई करता?
