उत्तराखंड जिला प्रशासन बना संकटमोचक: मीना ठाकुर और अमृता जोशी को सीएसआर फंड से 1-1 लाख की आर्थिक सहायता,,,,,

देहरादून। जनपद में असहाय, पीड़ित एवं जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के प्रति जिला प्रशासन लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी के मानवीय हस्तक्षेप से कठिन परिस्थितियों से जूझ रहीं दो महिलाओं—पांच बच्चों की माता मीना ठाकुर और दो बच्चों की परित्यक्ता माता अमृता जोशी—को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी ने दोनों प्रकरणों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके बाद यह सहायता उपलब्ध कराई गई।

🟢 आठ वर्षों से लापता पति, पांच बच्चों की जिम्मेदारी निभा रहीं मीना ठाकुर को राहत
सुद्धोवाला निवासी मीना ठाकुर ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी कठिनाइयों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उनके पति लगभग आठ वर्षों से लापता हैं और उनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। ऐसे में पांच बच्चों—चार बेटियों और एक बेटे—का पालन-पोषण, शिक्षा और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है। परिवार में दो बेटियां दिव्यांग भी हैं, जिनकी देखभाल और उपचार के कारण आर्थिक बोझ और बढ़ गया था।
आर्थिक तंगी के कारण किराये के मकान में रहकर परिवार का गुजर-बसर करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने सीएसआर फंड से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मीना ठाकुर के परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जाए। साथ ही उनकी तीन बेटियों की शिक्षा को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा” के माध्यम से पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए गए, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। इसके अलावा जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी को दिव्यांग बेटियों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से उपलब्ध कराने को कहा गया।
🟢 परित्यक्ता अमृता जोशी के लिए भी बना सहारा जिला प्रशासन
खुड़बुड़ा क्षेत्र में किराये के मकान में रहने वाली परित्यक्ता महिला अमृता जोशी दूसरों के घरों में काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं। उनके परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उनका बड़ा बेटा मानसिक विकार से ग्रस्त है, जिसके उपचार में लगातार खर्च हो रहा था। सीमित आय के कारण घर का खर्च और बेटे का इलाज कर पाना उनके लिए मुश्किल हो गया था।
इसी बीच कई महीनों से स्कूल फीस जमा न होने के कारण छोटे बेटे को विद्यालय से निकाल दिया गया। वहीं किराया न चुका पाने के कारण मकान मालिक ने उन्हें घर से भी बाहर कर दिया। ऐसे में अमृता जोशी ने जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगाई।
अमृता की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीएसआर फंड से उन्हें भी एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई।
🟢 मानवीय पहल से मिला सहारा
प्राप्त सहायता से अमृता जोशी अपने बड़े बेटे का उपचार कराने, छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा करने तथा मकान का बकाया किराया चुकाने में सक्षम हो सकेंगी। साथ ही वह इस राशि से कोई छोटा स्वरोजगार शुरू कर अपने परिवार के लिए स्थायी आय का स्रोत भी विकसित कर सकेंगी।
जिलाधिकारी की इस पहल से दोनों जरूरतमंद परिवारों को संकट की घड़ी में बड़ी राहत मिली है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि असहाय, दिव्यांग, महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के लिए आगे भी इसी प्रकार मानवीय और त्वरित कदम उठाए जाते रहेंगे।
