उत्तराखंड में अर्द्धकुंभ 2027 की आधिकारिक तैयारियों को मिली रफ्तार, सीएम धामी की अध्यक्षता में घोषित हुई स्नान तिथियां, पहली बार होंगे चार शाही स्नान,,,,
उत्तराखंड में अर्द्धकुंभ 2027 की आधिकारिक तैयारियों को मिली रफ्तार, सीएम धामी की अध्यक्षता में घोषित हुई स्नान तिथियां, पहली बार होंगे चार शाही स्नान,,,,

हरिद्वार: धार्मिक आस्था के केंद्र हरिद्वार में 2027 में होने वाले अर्द्धकुंभ की तैयारियां अब औपचारिक रूप ले चुकी हैं। शुक्रवार को डामकोठी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, अखाड़ों के संत-समाज और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर आगामी कुंभ की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही
🏵️ अर्द्धकुंभ के लिए प्रमुख और शाही स्नान तिथियों की औपचारिक घोषणा 🏵️
बैठक में सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि पहली बार एक मंच पर उपस्थित हुए, जहां अर्द्धकुंभ को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए रणनीति पर मंथन किया गया।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि देश भर के श्रद्धालुओं की नजरें इस बार हरिद्वार के अर्द्धकुंभ पर टिकी हैं। उन्होंने समय से पहले व्यवस्थाओं को क्रियान्वित करने की दिशा में मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए कदम की सराहना की।
मुख्यमंत्री धामी ने संतों को भरोसा दिलाया कि उनकी हर सलाह और परंपरा का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा,
“अर्द्धकुंभ 2027 को विश्वस्तरीय आयोजन बनाने के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो चुकी हैं।”
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषित किया कि अर्द्धकुंभ की औपचारिक शुरुआत 13 जनवरी 2027 को मकर संक्रांति से होगी।
🏵️ पहली बार चार शाही स्नान — परंपरा में ऐतिहासिक विस्तार 🏵️
इस बार संत समाज ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए चार शाही (अमृत) स्नान की घोषणा की है, जिसे परंपरा के विकास और विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
🏵️ प्रमुख पर्व स्नान तिथियां 🏵️
तिथि – पर्व
14 जनवरी 2027 मकर संक्रांति
6 फरवरी 2027 मौनी अमावस्या
11 फरवरी 2027 बसंत पंचमी
20 फरवरी 2027 माघ पूर्णिमा
🏵️ चार शाही स्नान तिथियां 🏵️
तिथि – अवसर
6 मार्च 2027 महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान)
8 मार्च 2027 सोमवती/फाल्गुन अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान)
14 अप्रैल 2027 मेष संक्रांति/वैशाखी (तीसरा अमृत स्नान)
20 अप्रैल 2027 चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान)
🏵️ अन्य विशेष पर्व 🏵️
तिथि – पर्व
7 अप्रैल नव संवत्सर
15 अप्रैल राम नवमी
संत समुदाय ने इन तिथियों की घोषणा को ऐतिहासिक बताया और विश्वास जताया कि इससे न सिर्फ देशभर के यात्रियों को यात्रा योजना बनाने में आसानी होगी, बल्कि अर्द्धकुंभ को वैश्विक धार्मिक आयोजन के रूप में नई पहचान भी मिलेगी।
अर्द्धकुंभ 2027 मात्र धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि आस्था, संस्कृति और उत्तराखंड के विकास का अनोखा संगम बनने जा रहा है।
