उत्तराखंड चमोली में टनल हादसों से हड़कंप, पीपलकोटी में तलाश जारी, तपोवन परियोजना में कैविटी और जल रिसाव ने अधिकारियों की बढ़ाई चिंता,,,

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े टनल निर्माण कार्यों में लगातार सामने आ रहे हादसों ने पूरे क्षेत्र में गंभीर चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। टीएचडीसी की पीपलकोटी टनल हादसे के जख्म अभी हरे ही थे कि एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड परियोजना में भी टनल के भीतर कैविटी (छेद) बनने और पानी के रिसाव की घटना सामने आई है, हालांकि समय रहते मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
🔴 पीपलकोटी टनल हादसा- लापता श्रमिकों की तलाश अभी तक जारी

13 अगस्त को टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना की टेल रेस टनल में अचानक मलबा और पानी घुसने से एक बड़ा हादसा हो गया था। इस गंभीर दुर्घटना में कई श्रमिक फंस गए थे। हालांकि बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन कुछ श्रमिकों की मृत्यु हो गई और दो श्रमिक अभी भी लापता हैं। मौके पर रेस्क्यू टीमें पानी निकालने, मलबा हटाने और लापता श्रमिकों की तलाश में जुटी हुई हैं। इस घटना ने संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में टनल निर्माण की भारी चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
🔴 तपोवन विष्णुगाड टनल में कैविटी और रिसाव

पीपलकोटी हादसे के बीच 15 अगस्त की सुबह एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य टनल की चोरमी एडिट टनल डीबीएम साइट में एक कैविटी बनने और उससे पानी का रिसाव होने की घटना सामने आई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सुरक्षा के लिहाज से उस हिस्से में काम कर रहे मजदूरों को तुरंत बाहर सुरक्षित निकाल लिया गया।
एनटीपीसी प्रबंधन के अनुसार, टनलिंग के दौरान इस तरह की छोटी कैविटी बनना निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और फिलहाल इससे किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं है। इसके बावजूद, सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रभावित हिस्से में मजदूरों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विशेषज्ञों की टीम आधुनिक मशीनों के साथ मौके पर तैनात है और कैविटी को सुरक्षित तरीके से भरने तथा प्रभावित हिस्से को मजबूत बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस हिस्से का पूर्ण उपचार नहीं हो जाता, तब तक वहां टनलिंग का काम आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
🔴 सुरक्षा और भूगर्भीय जांच पर उठे गंभीर सवाल

लगातार सामने आ रही इन दो घटनाओं ने टनल निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भूगर्भीय स्टडी और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिमालयी क्षेत्र में चट्टानों की जटिल संरचना, अप्रत्याशित जल प्रवाह और मॉनसून का प्रभाव बड़ी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टनल निर्माण के दौरान कैविटी की समय रहते पहचान न हो, तो यह बड़े खतरे का रूप ले सकती है। तपोवन में प्रबंधन की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन पीपलकोटी में रेस्क्यू अभियान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। दोनों मामलों के बाद अब स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा और पारदर्शिता की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।
यह तमाम घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि जलविद्युत परियोजनाएं ऊर्जा जरूरतों के लिए जितनी महत्वपूर्ण हैं, उससे कहीं अधिक जरूरी श्रमिकों की जान की सुरक्षा है। ऐसे संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों से पूर्व विस्तृत भूगर्भीय सर्वेक्षण, नियमित मॉनिटरिंग, आधुनिक सेंसर तकनीक और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना अनिवार्य है।
