उत्तराखंड विश्व के सबसे बड़े पारदेश्वर महादेव की स्थापना पर हरिद्वार में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, सनातन संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प,,,,

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के रुड़की रोड स्थित बहादराबाद टोल प्लाजा के समीप श्री साईं शिव गंगा धाम में बुधवार को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अध्याय रचा गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच विश्व के सबसे बड़े 5210 किलोग्राम वजन के पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए देशभर से आए पूज्य संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और हजारों श्रद्धालु उमड़े, जिन्होंने विश्व कल्याण और राष्ट्र समृद्धि की कामना की।
🟢 संत समाज का संदेश: अध्यात्म से ही संभव है विश्व शांति
समारोह में देश के शीर्ष संतों और आध्यात्मिक गुरुओं का समागम हुआ, जिन्होंने सनातन संस्कृति और पारद शिवलिंग के महत्व पर प्रकाश डाला:
- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वश्रम महाराज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानवता के आध्यात्मिक उत्थान और सनातन धर्म के संरक्षण का एक दिव्य अभियान है। भारत की आध्यात्मिक शक्ति ही विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकती है।
- जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने पारद शिवलिंग की महिमा बताते हुए कहा कि कलियुग में इनकी उपासना से शीघ्र फल मिलता है और यह रोग, शोक व दरिद्रता का नाश करने वाला है।
- निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि पारे को बांधकर शिवलिंग का रूप देना ऋषियों की रस विद्या का एक अद्भुत चमत्कार है। उन्होंने गुरु रघुनाथ यमूल की प्रेरणा से इस कार्य को सिद्ध करने के लिए राजीव बंसल की सराहना की।
- साध्वी ऋतम्भरा दीदी ने नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण पर ओजस्वी विचार रखे और कहा कि इस स्थापना से हरिद्वार की महिमा में एक नया अध्याय जुड़ा है।
- आध्यात्मिक गुरु सुधांशु महाराज और महंत रविन्द्र पुरी महाराज ने इसे तीर्थनगरी के प्रवेश द्वार पर भगवान शिव का अलौकिक आशीर्वाद और विश्व कल्याण के लिए एक पावन अवसर बताया। इसके साथ ही श्रीमहंत भगतराम महाराज, स्वामी ज्ञानदेव महाराज और महंत विष्णु दास ने भी समाज को संबोधित किया।

🟢 सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना की आवश्यकता
विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक संस्कृति है। उन्होंने युवाओं को अपने धर्म और संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
धाम के मैनेजिंग ट्रस्टी राजीव बंसल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
”विश्व के सबसे बड़े पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानव कल्याण, विश्व शांति और सनातन संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से की गई है। आने वाले समय में श्री साईं शिव गंगा धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।”

🟢 प्रमुख गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य महोत्सव का कुशल संचालन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद गिरी ने किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, प्रसिद्ध उद्योगपति राजेंद्र अग्रवाल, गौरव गाडिलकर, विहिप के केंद्रीय सह मंत्री हरिशंकर और रुड़की की मेयर अनिता अग्रवाल सहित कई राजनैतिक व सामाजिक क्षेत्रों की हस्तियां उपस्थित रहीं।

उत्सव के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने पारदेश्वर महादेव का अभिषेक व पूजन किया। आयोजन समिति ने इस महोत्सव को सनातन संस्कृति के इतिहास का एक मील का पत्थर बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को निरंतर
