जम्मू में तैनात टिहरी के अग्निवीर जवान की गोली लगने से मृत्यु
देहरादून/टिहरी:
जम्मू-कश्मीर में देश की सीमाओं की निगहबानी कर रहे टिहरी गढ़वाल के एक अग्निवीर जवान की गोली लगने से मृत्यु हो गई है। इस दुखद खबर के सामने आने के बाद से पूरे उत्तराखंड और विशेषकर टिहरी जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
घटना की पृष्ठभूमि
टिहरी जिले के रहने वाले युवा अग्निवीर जवान जम्मू-कश्मीर के एक संवेदनशील अग्रिम इलाके में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक गोली लगने (जिसकी सैन्य अधिकारियों द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है) के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सैन्य और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, घटना की वास्तविक वजहों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी या उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है, जैसा कि सैन्य प्रोटोकॉल के तहत अमूमन किया जाता है।
’वीरभूमि’ में पसरा मातम
जैसे ही जवान की शहादत की खबर उनके पैतृक गांव पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं स्थानीय ग्रामीण और शुभचिंतक शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं।
उत्तराखंड का इतिहास रहा है कि यहां का लगभग हर दूसरा परिवार सेना से जुड़ा है। ऐसे में एक युवा अग्निवीर का इस तरह असमय चले जाना पूरे प्रदेश के लिए एक गहरी क्षति है। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवा जवान ने बेहद कम उम्र में देश सेवा का जो जज्बा दिखाया, उस पर पूरे क्षेत्र को गर्व है।
सैन्य सम्मान के साथ दी जाएगी अंतिम विदाई
शहीद जवान के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाने की तैयारियां की जा रही हैं।
- सैन्य सम्मान: नियमानुसार सेना के जवान और अधिकारी पार्थिव शरीर के साथ पहुंचेंगे।
- अंतिम संस्कार: स्थानीय घाट पर पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ जवान को अंतिम विदाई दी जाएगी, जहां क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
एक अपूरणीय क्षति
”देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले इस युवा अग्निवीर के सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। दुख की इस घड़ी में पूरा देश और प्रदेश उनके परिवार के साथ खड़ा है।”
यह घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि हमारे सैनिक किन कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की संप्रभुता की रक्षा करते हैं। टिहरी के इस वीर सपूत को उनकी कर्तव्यनिष्ठा और शहादत के लिए शत्-शत् नमन।
