उत्तराखंड केदारनाथ से मसूरी तक 8 रोपवे प्रोजेक्ट्स पर तेजी से हो काम, सुरक्षा सुविधा सहित तय समय मे काम पूरा करने के धामी ने दिए सख्त निर्देश,,,

देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में केदारनाथ से लेकर मसूरी तक कुल 8 प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय में इन सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
🟢 धीमी रफ्तार पर नाराजगी और कड़े निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश देते हुए कहा कि आगामी 9 नवंबर तक सभी रोपवे प्रोजेक्ट्स के कार्य धरातल पर प्रमुखता से दिखाई देने चाहिए। इसके अलावा, सभी निर्माण एजेंसियों को 15 दिन के भीतर अब तक की प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री स्वयं इन सभी परियोजनाओं की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करेंगे।
🟢 पार्किंग सुविधा और निजी निवेश पर जोर
सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक रोपवे परियोजना के साथ पर्याप्त पार्किंग सुविधा को भी मुख्य योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। साथ ही, राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए लाइसेंसिंग और अनुमोदन की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया, ताकि निवेशकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
🟢 सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को दी सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी और पर्यटन से जुड़े हर प्रोजेक्ट में यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही, निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पूरी तरह पालन हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी ‘इकोनॉमी’ के साथ-साथ ‘इकोलॉजी’ को भी बराबर महत्व दे रहा है और विकास के इस सफर में पर्यावरण का संतुलन किसी भी कीमत पर नहीं बिगड़ना चाहिए।
🟢 उत्तराखंड के 8 प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट्स एक नजर में
राज्य सरकार द्वारा जिन प्रमुख रोपवे परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, उनका विवरण इस प्रकार है:
- सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ: लंबाई 12.90 किलोमीटर
- गोविंद घाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब: लंबाई 12.40 किलोमीटर
- काठगोदाम बस स्टैंड-हनुमान गढ़ी मंदिर: लंबाई 14.90 किलोमीटर
- जोशीमठ-औली-गौरसौं: लंबाई 6.92 किलोमीटर
- गौंडार-श्रीमदमहेश्वर: लंबाई 6.5 किलोमीटर
- देहरादून-पुरकुल-मसूरी: लंबाई 5.5 किलोमीटर
- जानकीचट्टी-यमुनोत्री मंदिर (यमुनोत्री प्रोजेक्ट): लंबाई 3.39 किलोमीटर
- तपोवन-कुंजापुरी रोपवे प्रोजेक्ट: लंबाई 4.84 किलोमीटर
इन सभी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों का सफर सुगम होगा, बल्कि सड़क मार्गों पर यातायात का भारी दबाव भी काफी हद तक कम हो सकेगा।
