तिब्बत के गिरोंग में भीषण बाढ़, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 80 यात्री फंसे, सद्गुरु ने खुद संभाला रेस्क्यू मोर्चा,,,

देहरादून: भारत-चीन और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन का एक पूरा जत्था फंस गया है। घटना तिब्बत के गिरोंग स्थित इमिग्रेशन सेंटर के पास हुई, जहां वापसी के दौरान तीर्थयात्री औपचारिकताएं पूरी कर रहे थे।
🔴 अचानक आई बाढ़ की चपेट में आया इमिग्रेशन सेंटर
तिब्बत के गिरोंग क्षेत्र में आई इस भयानक फ्लैश फ्लड ने इमिग्रेशन कार्यालय और आसपास के पूरे कस्बे को अपनी आगोश में ले लिया है। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्ग वासुदेव (सद्गुरु) ने बताया कि घटना से ठीक 10 मिनट पहले ग्रुप के लीडर से बातचीत हुई थी, तब तक स्थिति सामान्य थी और किसी प्रकार की चेतावनी नहीं मिल पाई थी। अचानक आए सैलाब के बाद से इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद लोगों से संपर्क टूट गया है और इमारत का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया है।
🔴 रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे सद्गुरु
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सद्गुरु खुद राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए गिरोंग पहुंच चुके हैं। सोशल मीडिया पर स्थिति की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि फाउंडेशन की टीम और वॉलंटियर्स स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर हरसंभव मदद में जुटे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल घड़ी में प्रभावितों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए हर मुमकिन कदम उठाया जा रहा है।
🔴 यात्रा पर गए श्रद्धालुओं का वर्तमान आंकड़ा
ईशा फाउंडेशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में यात्रा के लिए कुल 21 समूह भेजे गए थे। इनमें से 495 श्रद्धालु सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग तिब्बत के अन्य हिस्सों में और 148 लोग नेपाल में सुरक्षित हैं। हालांकि, गिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर फंसे 80 लोगों और लापता हुए यात्रियों को लेकर चिंता बनी हुई है, जिनका फिलहाल कोई आधिकारिक अपडेट नहीं मिल पाया है। इसके अलावा नेपाल के तिमुरे क्षेत्र में फाउंडेशन के 3 वॉलंटियर्स भी मौजूद हैं।
