उत्तराखंड, देहरादून में अनिगमित क्षेत्र के कामगारों की चांदी, देश के बड़े महानगरों को पछाड़कर वेतन के मामले में आया अव्वल,,,,

देहरादून। गैर-कॉर्पोरेट (अनिगमित) क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों को देश के कई बड़े मेट्रो शहरों की तुलना में सबसे ज्यादा वेतन मिल रहा है। भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, दून में इन कामगारों का औसत सालाना वेतन 4.60 लाख रुपये है, जो राष्ट्रीय औसत 1.47 लाख रुपये से लगभग तीन गुना अधिक है। इस मामले में देहरादून ने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों को भी पीछे छोड़ दिया है।
🟢 प्रमुख शहरों में औसत सालाना वेतन की तुलना
- देहरादून: ₹4.60 लाख
- दिल्ली एनसीआर: ₹2.50 लाख
- मुंबई: ₹3.00 लाख (आसपास)
- बेंगलुरु: ₹3.00 लाख (आसपास)
- लखनऊ: ₹1.65 लाख
- हरिद्वार: ₹2.40 लाख
- ऊधम सिंह नगर: ₹2.25 लाख
- हल्द्वानी: ₹2.10 लाख
🟢 वेतन बढ़ने के मुख्य कारण
शहर में आईटी, उच्च शिक्षा, कोचिंग संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन से जुड़ी पेशेवर सेवाओं में तेजी से विस्तार हुआ है। वर्तमान में यहाँ 74,843 अनिगमित उद्यमों में लगभग 1.72 लाख कामगार कार्यरत हैं, जिनमें 31 प्रतिशत इकाइयां दैनिक दिहाड़ी वाले श्रमिकों की हैं। हाई वैल्यू एडिशन सेवाओं और कुशल कार्यबल की अधिक मांग के कारण देहरादून गैर-कॉर्पोरेट सेक्टर में सबसे ज्यादा वेतन देने वाला शहर बना है।
🟢 पर्वतीय जिलों की स्थिति
मैदानी जिलों की तुलना में उत्तराखंड के पर्वतीय जिले अभी इस मामले में पीछे हैं। हरिद्वार में सिडकुल और विनिर्माण के चलते औसत वेतन 2.40 लाख और ऊधम सिंह नगर में ऑटोमोबाइल व फार्मा उद्योगों की वजह से 2.25 लाख रुपये सालाना है। वहीं, टिहरी में 1.60 लाख रुपये के अलावा बाकी पर्वतीय जिलों में औसत वार्षिक वेतन 1.15 लाख से 1.40 लाख रुपये के बीच दर्ज किया गया है। सरकार की इस सर्वे रिपोर्ट ने राज्य में रोजगार और तरक्की की एक नई उम्मीद जगाई है।
