उत्तराखंड अंकिता भंडारी हत्याकांड पर SIT का जवाब- पूर्व ASP शेखर सुयाल ने उर्मिला सनावर के आरोपों, जांच और ‘VIP’ के नाम पर दी विस्तृत जानकारी,,,
देहरादून: उर्मिला सनावर के हालिया वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े हो गए हैं। इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए शनिवार, 3 जनवरी को मीडिया से बातचीत में पौड़ी के पूर्व एएसपी और इस बहुचर्चित मामले की एसआईटी के सदस्य रहे शेखर सुयाल ने जांच प्रक्रिया, आरोपों और तथाकथित ‘वीआईपी’ एंगल पर विस्तार से जानकारी दी।

शेखर सुयाल ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एसआईटी द्वारा की गई थी, जिसे न सिर्फ ट्रायल कोर्ट बल्कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना। उन्होंने कहा कि जांच में किसी भी तरह से न तो तथ्यों से छेड़छाड़ की गई और न ही सबूतों को नष्ट किया गया। एसआईटी की निष्पक्ष और गहन जांच के चलते ही तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई, और आज भी वे जेल में बंद हैं।

पूर्व एएसपी ने बताया कि एसआईटी ने वनंत्रा रिजॉर्ट से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच की। आरोपियों ने पहले से ही एक झूठा सिनेरियो तैयार किया था, ताकि यह दिखाया जा सके कि अंकिता अपने दोस्तों के साथ चली गई है। इसी के तहत 18 सितंबर 2022 को आरोपियों ने पटवारी के पास गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। यह भी सामने आया कि अंकिता का दोस्त पुष्पदीप, जो जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है, घटना से दो दिन पहले यानी 15 और 16 सितंबर को रिजॉर्ट आया था, जिसका आरोपियों ने अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश की।

शेखर सुयाल के अनुसार, 22 सितंबर 2022 को मामला पूरी तरह पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद एसआईटी ने तीनों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की, जिसमें यह खुलासा हुआ कि अंकिता से ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ की मांग की जा रही थी, जिसे उसने ठुकरा दिया था। इसी के चलते 18 सितंबर की रात करीब 9 बजे अंकिता की हत्या कर उसे गंगा में धक्का दे दिया गया। उसी समय उसका फोन भी बंद हो गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि 22 सितंबर को ही अंकिता के कमरे को सील कर दिया गया था और 23 सितंबर की सुबह एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ सभी जरूरी साक्ष्य एकत्र किए। बाद में इन्हीं साक्ष्यों को कोर्ट में पेश किया गया, जिसके आधार पर आरोपियों को सजा हुई। रिसॉर्ट पर जेसीबी कार्रवाई बाद की प्रक्रिया थी, उससे पहले सभी सबूत सुरक्षित कर लिए गए थे।
🔴 वीआईपी’ एंगल पर खुलासा 🔴
शेखर सुयाल ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों की आपसी चैट में एक ‘वीआईपी’ का जिक्र सामने आया था। इसके बाद एसआईटी ने अंकिता के दोस्त और रिजॉर्ट स्टाफ से पूछताछ की। जांच में नोएडा निवासी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान का नाम सामने आया, जिनसे एसआईटी ने पूछताछ की और उनके बयान विवेचना में शामिल किए गए। जांच में यह सामने आया कि वह व्यक्ति जमीन के एक मामले के सिलसिले में क्षेत्र में आया था और कुछ समय के लिए रिजॉर्ट में खाना खाने रुका था। एसआईटी ने इस जानकारी को क्रॉस-चेक किया और उसे सही पाया।

शेखर सुयाल ने कहा कि सोशल मीडिया पर उछाले गए अन्य नामों की भी गंभीरता से जांच की गई, लेकिन उनमें से किसी के खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। उन्होंने दोहराया कि एसआईटी ने बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच की और अदालतों ने भी उसी जांच को सही ठहराया।
अंत में उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ चली है और पीड़िता को न्याय दिलाने में जांच एजेंसियों ने कोई कोताही नहीं बरती।


