उत्तराखंड 20 पड़ावों में 280 किलोमीटर की नंदा देवी राजजात यात्रा स्थगित, यह वजह आई सामने,,,,

देहरादून: नंदा देवी राजजात यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। समिति ने इसके पीछे यात्रा के समय हिमालय में बर्फबारी की आशंका जताई है। इस यात्रा को हिमालय महाकुंभ भी कहा जाता है।
वर्ष 2026 के अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात इस साल नहीं होगी। 20 पड़ावों में 280 किलोमीटर की इस यात्रा को ‘हिमालय महाकुंभ’ भी कहा जाता है। नंदा देवी राजजात समिति ने बताया है कि सितंबर में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की आशंका और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। समिति अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि यात्रा अब वर्ष 2027 में आयोजित होगी।
कर्णप्रयाग में पत्रकार वार्ता में डॉ. कुंवर ने बताया कि नंदा राजजात-2026 स्थगित करने का ऐलान 23 जनवरी को नौटी गांव में होने वाले मनौती कार्यक्रम में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सितंबर में बर्फबारी की आशंका रहती है। इससे यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा संचालन में कठिनाई हो सकती हैं। इसे देखते हुए इस बार राजजात को स्थगित करने का निर्णय किया है।
🟢 आयोजन टलने के पीछे मतभेत!
सूत्रों के अनुसार, कुरूड़ और नौटी से नंदा राजजात/नंदाजात के शुभारंभ को लेकर हाल में उत्पन्न मतभेदों के चलते आयोजन को टालने का फैसला लिया गया है। हालांकि समिति पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए ही लिया गया है।
🟢 नंदा देवी राजजात
यह यात्रा देवी नंदा को उनके मायके से विदाई देने का उत्सव है। जिसे ‘हिमालय का महाकुंभ’ भी कहा जाता है। चमोली के नौटी गांव से शुरू होने वाली 19 से 22 दिन तक चलने वाली यह यात्रा होमकुंड (रूपकुंड के पास) में समाप्त होती है।
🟢 शासन को सौंपे प्रस्ताव
नंदा राजजात समिति ने पत्रकार वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे। इस दौरान समिति की ओर से शासन से मांग की गई कि हिमालय सचल महाकुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर नंदा देवी राजजात प्राधिकरण का गठन किया जाए। यह प्राधिकरण न केवल नंदा देवी राजजात, बल्कि नंदा लोकजात, वार्षिक यात्राओं और उत्तराखंड में नंदा देवी के नाम से आयोजित होने वाले सभी मेलों की योजनाएं तैयार कर उनके विकास का कार्य करे। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि नंदा देवी राजजात का पारंपरिक और धार्मिक दायित्व पूर्व की भांति गढ़वाल के राजवंशी कुंवरों के पास सुरक्षित रहेगा।
