उत्तराखंड ईमानदारी की मिसाल, IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने 3 लाख से अधिक भत्ता राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में की दान,,,,

देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने एक बार फिर अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रति समर्पण की मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने आधिकारिक दौरों के दौरान मिलने वाली 3 लाख रुपये से अधिक की पूरी भत्ता राशि Uttarakhand Chief Minister Relief Fund में दान कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह राशि 17 दिसंबर 2016 से अगस्त 2025 तक कुल 447 दिनों के आधिकारिक दौरों के दौरान मिलने वाले भत्तों की थी। खास बात यह है कि इस अवधि में उन्होंने कभी भी भत्ता प्राप्त नहीं किया और अब पूरी राशि जनकल्याण के लिए समर्पित कर दी।
4 अप्रैल 2026 को वन विभाग के प्रमुख को लिखे पत्र में उन्होंने इस राशि को राहत कोष में जमा करने का अनुरोध किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि “देवभूमि की सेवा और वन-वन्यजीवों के संरक्षण से मिलने वाली संतुष्टि ही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।”
वन संरक्षण के क्षेत्र में भी संजीव चतुर्वेदी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने राज्य में 25 वनस्पति संरक्षण केंद्र स्थापित किए और त्रायमाण, जटामासी, अतिस व तकिल पाम जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा हिमालयन मार्मोट, उड़न गिलहरी, किंग कोबरा और माउंटेन वीज़ल जैसे वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष कार्य किया।
उनकी इस पहल की सराहना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जवेडकर सहित कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने की है।
गौरतलब है कि यह उनका पहला दान नहीं है। इससे पहले भी वे Ramon Magsaysay Award की पूरी राशि, पुलवामा शहीदों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और अन्य पुरस्कारों की धनराशि जनहित में दान कर चुके हैं।
संपत्ति के नाम पर ‘शून्य’ और सेवा में ‘सर्वोच्च’ की मिसाल बने संजीव चतुर्वेदी का यह कदम सरकारी तंत्र में ईमानदारी और पारदर्शिता का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
