उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में आज 11 प्रस्तावों पर लगी मुहर, आम जनता,कर्मचारियों,कलाकारों, उद्योग और स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रो में हुए कई बड़े बदलाव ,,,

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज आयोजित उत्तराखंड कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक समाप्त हो गई। बैठक में कुल 11 अहम प्रस्तावों पर कैबिनेट की स्वीकृति मिली। फैसलों में आम जनता, कर्मचारियों, कलाकारों, उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई बड़े निर्णय शामिल हैं।
कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए नेचुरल गैस पर वैट की दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। वहीं कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के प्रस्ताव पर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादित रॉयल डेलिशियस सेब के दाम तय किए गए हैं, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सकेगा।
राज्य के कलाकारों के लिए भी राहत भरा निर्णय लिया गया है। कलाकारों को दी जाने वाली मासिक पेंशन को 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये कर दिया गया है। यह फैसला लंबे समय से की जा रही मांग के बाद लिया गया।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े एक अहम फैसले में लो रिस्क बिल्डिंग के मामलों में अब भवन मानचित्र पैनल आर्किटेक्ट के माध्यम से स्वीकृत कराए जा सकेंगे। इसके लिए अब प्राधिकरण के चक्कर काटने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। इसके साथ ही औद्योगिक विकास विभाग के तहत लॉज में ग्राउंड कवरेज बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई।
कार्मिक मामलों में बड़ा बदलाव करते हुए कैबिनेट ने तय किया कि तकनीकी प्रवृत्ति के स्टाफ को अब पहले की तरह उपनल के माध्यम से नहीं, बल्कि खुले बाजार या आउटसोर्सिंग से लिया जाएगा। वहीं वर्ग चार कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय में कहा गया है कि यदि किसी कर्मचारी ने वर्ग चार के रूप में कार्य किया है और बाद में वह परमानेंट हो गया है, तो उसे पेंशन का लाभ दिया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अहम फैसले लिए हैं। आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजना को अब शत प्रतिशत इंश्योरेंस मोड में संचालित किया जाएगा। वहीं गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड में चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत 5 लाख रुपये तक के क्लेम इंश्योरेंस मोड में होंगे और उससे अधिक राशि का वहन राज्य सरकार करेगी।
इसके अलावा श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन एवं प्रबंधन समिति के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के समान कार्य, समान वेतन के लंबित मामलों को लेकर कैबिनेट ने इसे उप समिति को रेफर कर दिया है, जो बैकलॉग मामलों पर निर्णय लेगी।
कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य सरकार की जनहित और कर्मचारी हितैषी नीतियों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
