उत्तराखंड दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भाजपा के लिए हुकुम का इक्का, तीन राज्यों में बदलेंगे सियासी समीकरण,,,,
देहरादून: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे केवल तेज रफ्तार वाली सड़क परियोजना नहीं। यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली की राजनीति को नया माइलेज देगा।
करीब 210 किलोमीटर लंबा यह कारिडोर दिल्ली से शुरू होकर पश्चिम उप्र के गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर जनपद के रास्ते उत्तराखंड पहुंचेगा।
यह एक्सप्रेसवे जिन जनपदों से गुजरेगा, भविष्य में उस पूरी पट्टी को आर्थिक-राजनीतिक रूप से समृद्ध करेगा। इसीलिए भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में एक्सप्रेसवे को उपलब्धि के तौर पर पेश कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में है।
🟢 सियासी गुणाभाग पर पड़ेगा सीधा असर
यह माना जा रहा है कि इसका सीधा असर सियासी गुणाभाग पर पड़ेगा। यह एक्सप्रेसवे गाजियाबाद (लोनी, गाजियाबाद), बागपत (बागपत, बड़ौत, छपरौली), शामली (कैराना, शामली, थानाभवन) और सहारनपुर की सातों विधानसभा सीटों को सीधे प्रभावित करेगा। उत्तराखंड में देहरादून क्षेत्र की दस विधानसभा सीटें एक्सप्रेसवे से प्रभावित होंगी।
आंकलन के अनुसार एक्सप्रेसवे अपने रूट पर स्थित 25 से 30 विधानसभा सीटों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव डालेगा। भाजपा इस परियोजना को डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत करेगी। एक्सप्रेसवे से होने वाले विकास, तेज कनेक्टिविटी, रोजगार व निवेश के वादों के साथ चुनावी माहौल बनाने की राजनीतिक कोशिश होगी।
🟢 उत्तराखंड के लिए लाइफलाइन
एक्सप्रेसवे से उत्तराखंड, खासकर देहरादून और आसपास के क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। दिल्ली से यात्रा समय घटकर ढाई से तीन घंटे होने से पर्यटन में तेजी आएगी, जिससे होटल, ट्रांसपोर्ट, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
निवेशकों की रुचि बढ़ने से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी का असर स्वास्थ्य, शिक्षा और आपात सेवाओं तक आसान पहुंच के रूप में दिखेगा। यही वजह है कि राज्य में इसे विकास की लाइफलाइन के तौर पर देखा जा रहा है।
🟢 छोटे शहर बनेंगे बड़े आर्थिक केंद्र
एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक कारिडोर, वेयरहाउसिंग और लाजिस्टिक्स हब विकसित होंगे। इससे किसानों को अपनी उपज बेहतर कीमत पर बेचने का मौका मिलेगा और छोटे शहर आर्थिक केंद्र बन सकेंगे। पर्यटन के लिहाज से मसूरी, ऋषिकेश और चारधाम यात्रा को भी लाभ मिलेगा।

