“निर्जला एकादशी” एकादशी तिथि पर प्रमुख तौर पर नारायण यानी भगवान विष्णु की होती है पूजा

abpindianews, नई दिल्ली – हिंदू पंचांग के अनुसार साल में 24 एकादशी होती हैं और सभी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। एकादशी तिथि पर प्रमुख तौर पर नारायण यानी भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इन सभी एकादशी में से कुछ का महत्व बेहद खास होता है और इन्हीं में से एक है निर्जला एकादशी। मान्यता है कि निर्जला एकादशी पर व्रत करने वाले व्रती को साल की बाकी 23 एकादशियों का व्रत करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। ग्रीष्म काल में पड़ने वाली निर्जला एकादशी पर दान करने का सर्वाधिक महत्व होता है। इस साल निर्जला एकादशी 21 जून को है। निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी और भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है और इस दिन व्रत करने वाले को दीर्घायु के साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इस एकादशी को लेकर ऐसी कथा मिलती है कि पांडवों में भीमसेन जिनके पेट में वृक नामक अग्नि होने से वह बिना भोजन के नहीं रह सकते थे, उन्होंने भी जब एकादशी के महत्व को जाना तो इस एकादशी का व्रत किया था, इसलिए इस एकादशी को भीमा एकादशी भी कहते हैं। पद्म पुराण में बताया गया है कि महर्षि वेदव्यासजी पांडवों को इस एकादशी के बारे में बताते हुए कहते हैं कि एकादशी के दिन जो भी दान, धर्म, हवन और पूजन किया जाता है उसका फल अक्षय होता है। इस दिन किए पुण्य के फल का मनुष्य अनेक-अनेक जन्मों में लाभ पाता है।