उत्तराखंड केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन के बाद 8 लोग लापता, हवाई रेकी में नहीं मिला सुराग; NIM और ड्रोन से तेज होगा रेस्क्यू ,,,

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित प्रसिद्ध केदारताल ट्रैक पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के बीच लापता हुए आठ लोगों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। लापता लोगों में सात ट्रैकर और एक स्थानीय गाइड शामिल हैं। शनिवार को हेलीकॉप्टर के माध्यम से प्रभावित इलाके की दो बार सघन हवाई रेकी की गई, लेकिन अत्यधिक बर्फ और प्रतिकूल मौसम के चलते दल अथवा उनके टेंट का कोई सुराग नहीं मिल सका।
🟢 27 अक्टूबर को निकला था 12 सदस्यीय दल, 4 सुरक्षित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सात ट्रैकर, एक गाइड, एक कुक और तीन पोर्टरों का 12 सदस्यीय दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। ऊंचाई वाले क्षेत्र में अचानक मौसम बिगड़ने से भारी बर्फबारी और एवलांच (हिमस्खलन) की स्थिति बन गई, जिससे पूरा दल फंस गया। सूचना पर शुरू किए गए बचाव अभियान के तहत 31 अक्टूबर को तीन पोर्टर और एक कुक को कच्ची ढांग के समीप से सुरक्षित निकाल कर गंगोत्री पहुंचा दिया गया था, जबकि शेष आठ लोग अभी भी लापता हैं।
🟢 हवाई रेकी में बाधा बना खराब मौसम

सेनानायक SDRF अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर विशेष पर्वतारोहण टीम को अभियान में उतारा गया है। पूर्व में गंगोत्री SDRF टीम ने जमीनी स्तर पर आगे बढ़ने का प्रयास किया था, लेकिन अत्यधिक बर्फ के कारण अभियान बाधित हुआ। इसके बाद हर्षिल से हेलीकॉप्टर के जरिए SDRF के हेड कांस्टेबल रवि चौहान और कांस्टेबल दीपक पंत ने केदारताल क्षेत्र का दो बार हवाई सर्वेक्षण किया। हालांकि, बर्फ की मोटी चादर और खराब दृश्यता के चलते कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल पाए।
🟢 NIM की हाई एल्टीट्यूड टीम और ड्रोन की ली जाएगी मदद
अभियान को गति देने के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की पांच सदस्यीय विशेष हाई एल्टीट्यूड रेस्क्यू टीम को मोर्चे पर उतारने की तैयारी है। इसके साथ ही दुर्गम दर्रों और खाइयों में सटीक निगरानी के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जाएगा। SDRF वाहिनी मुख्यालय से उन्नत रेस्क्यू उपकरणों से लैस एक अतिरिक्त बैकअप टीम भी रवाना कर दी गई है।
अत्यधिक ऊंचाई, हाड़ कंपाने वाली ठंड, हिमस्खलन का निरंतर खतरा और तेजी से बदलता मौसम बचाव कर्मियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल और मेडिकल टीमें लगातार समन्वय बनाए हुए हैं।
