उत्तराखंड अंकिता भंडारी प्रकरण पर गरमाई सियासत, राज्यपाल नियुक्ति और माता-पिता को हिरासत में लेने पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, भाजपा ने साधा निशाना,,,,
हरिद्वार/देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। एक ओर जहां दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने और दिल्ली में अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के विरोध में कांग्रेस व विभिन्न संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर इस संवेदनशील मुद्दे पर गैरजिम्मेदार राजनीति करने का आरोप लगाया है।
🔴 देवपुरा चौक पर कांग्रेस का प्रदर्शन, राज्यपाल नियुक्ति रद्द करने की मांग

हरिद्वार जिला महानगर कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने देवपुरा चौक पर भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को तुरंत रद्द करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग उठाई।
जिला महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमन गर्ग और स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मुरली मनोहर ने कहा कि अपनी बेटी खो चुके माता-पिता को न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। सरकार द्वारा उनकी पीड़ा सुनने के बजाय दिल्ली पुलिस से उन्हें हिरासत में दिलवाना सत्ता की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड अपनी बेटी के साथ हुए अन्याय को कभी नहीं भूलेगा।
🔴 सिडकुल में विभिन्न संगठनों ने फूंका सरकार का पुतला
उधर सिडकुल में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और इंकलाबी मजदूर केंद्र सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अंकिता भंडारी के हत्यारों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला दहन किया। इस मौके पर नीता, प्रीति, जयप्रकाश सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
🔴 भाजपा का पलटवार- ‘अंकिता मामले पर गैरजिम्मेदार राजनीति कर रही कांग्रेस’

दूसरी तरफ, देहरादून में भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता अनुकृति गुसाईं ने कांग्रेस पर भ्रामक और गैरजिम्मेदाराना राजनीति करने का कड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और न्यायसंगत तरीके से त्वरित कार्रवाई की है।
अनुकृति गुसाईं ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने तत्काल व निर्णायक कदम उठाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कराया और एसआईटी का गठन कर तीनों हत्यारों को उम्रकैद की सजा तक पहुंचाया। प्रभावी कानूनी पैरवी के कारण ही दोषियों को जमानत तक नहीं मिल सकी।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार लगातार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रही है। परिजनों की मांग पर सरकारी अधिवक्ता बदले गए और मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की तथा दिवंगत बेटी के पिता और भाई को सरकारी नौकरी भी उपलब्ध कराई है।

