उत्तराखंड हरिद्वार के गंगा घाटों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने का कड़ा संकल्प,अल्टीमेटम,’लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी’, रेस्क्यू बच्चों को भेजे आश्रय गृह- मयूर दीक्षित

हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले के दृष्टिगत धर्मनगरी हरिद्वार के गंगा घाटों को भिक्षुक-मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने मीडिया रिपोर्ट्स और बाल कल्याण समिति (CWC) की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए धर्मनगरी में बढ़ती भिक्षुकों की संख्या पर सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हर की पैड़ी समेत किसी भी घाट अथवा प्रमुख स्थल पर यदि भिक्षुक दिखाई दिए, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
🟢 घाटों पर बढ़ रही बाल भिक्षुकों की तादाद पर चिंता

बाल कल्याण समिति के सदस्य दिनेश शर्मा और सोनिका द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में एक चिंताजनक पहलू सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां अधिकतर उम्रदराज लोग ही भिक्षावृत्ति करते नजर आते थे, वहीं अब विभिन्न घाटों पर मासूम बच्चों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इस स्थिति को अत्यंत गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने बच्चों को भिक्षावृत्ति के दलदल से मुक्त कराने के लिए सघन अभियान चलाने के आदेश दिए हैं।
🟢 पुनर्वास और सुरक्षा के लिए संयुक्त टीम का गठन
बाल भिक्षावृत्ति के उन्मूलन हेतु एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), चाइल्ड हेल्पलाइन और श्रम विभाग की एक संयुक्त टीम गठित की गई है। यह टीम सक्रिय रूप से भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के कार्य में जुटी हुई है। रेस्क्यू किए गए बच्चों की सुरक्षा और उचित संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कनखल और ज्वालापुर स्थित खुले आश्रय गृहों में भेजा जा रहा है।
🟢 ‘हाथों में भिक्षापात्र नहीं, किताबें होनी चाहिए’

अभियान से जुड़ी अधिकारी सुनीता चौधरी ने कहा कि बच्चों को भीख मांगते देखना अत्यंत पीड़ादायक है; उनका बचपन घाटों पर भीख मांगने के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा ग्रहण करने और अपनी प्रतिभा निखारने के लिए है। इस संयुक्त अभियान के दौरान बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष प्रियबंधु शर्मा, सदस्य दिनेश शर्मा, सुनीता चौधरी सहित अन्य संबंधित अधिकारी व सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
