उत्तराखंड में मतदाता सूची से नाम हटाने पर राजनीतिक घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा ने बताया ‘लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश’,,,,

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (एसआईआर – SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम विलोपित (हटाए) किए जाने को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने प्रक्रिया की वैधानिकता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
🔴 कांग्रेस का आरोप- नियमों की अनदेखी कर हटाए गए लाखों नाम

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा / गणेश गोदियाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को पत्र लिखकर एसआईआर प्रक्रिया के तहत नाम हटाने की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
- अवैधानिक प्रक्रिया का दावा: कांग्रेस का आरोप है कि नियमों (रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2)) के तहत आपत्ति केवल वही व्यक्ति दर्ज करा सकता है जिसका नाम सूची में हो। निर्वाचन अधिकारी खुद आपत्तिकर्ता नहीं बन सकते, जबकि लाखों मामलों में फॉर्म-7 स्वतः ही सृजित (Generate) किए गए हैं।
- हजारों मामले विसंगति श्रेणी में: कांग्रेस के अनुसार, 97,186 मतदाताओं के फॉर्म-7 दस्तावेज जमा न होने के कारण ‘विसंगति’ की श्रेणी में रखे गए। इसके बावजूद नाम हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
- समीक्षा की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि यदि नाम विलोपन की पूरी प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध हुई है, तो हटाए गए नामों को पुनः शामिल करने के लिए फॉर्म-6 प्रस्तुत करने की अनिवार्यता पर पुनर्विचार कर पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
🔴 भाजपा का पलटवार- फर्जी मतदाताओं को हटाना ‘देशद्रोह’ नहीं, कांग्रेस की बौखलाहट सामने आई

कांग्रेस के आरोपों और दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिए गए बयानों पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीखा हमला बोला है।
- लोकतंत्र पर हमला बताया: महेंद्र भट्ट ने कहा कि पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतंत्र को कमजोर करने की सोची-समझी साजिश है।
- दिवंगत और फर्जी नामों पर सवाल: उन्होंने कहा, “क्या दिवंगत और फर्जी लोगों को मतदाता सूची में बनाए रखना ही कांग्रेस की मंशा है? अगर फर्जी नाम हटाए जा रहे हैं, तो इसमें कांग्रेस को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?”
- संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास: भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने पर कांग्रेस हमेशा चुनाव आयोग और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर लांछन लगाती है। उन्होंने सवाल किया कि जब वे अन्य राज्यों में चुनाव जीतते हैं तब व्यवस्था सही होती है, लेकिन हारने पर मुख्य चुनाव आयुक्त पर बेबुनियाद आरोप लगाना उनकी हताशा को दर्शाता है।
मतदाता सूची शुद्धिकरण को लेकर प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक ओर जहां कांग्रेस इसे वैध मतदाताओं के मताधिकार पर कुठाराघात बता रही है, वहीं सत्तापक्ष इसे पारदर्शी चुनावी व्यवस्था की दिशा में उठाया गया आवश्यक कदम करार दे रहा है।
