उत्तराखंड हरिद्वार नगर निगम बोर्ड बैठक में हुआ जोरदार हंगामा, मेयर बोलीं “काम नहीं होंगे तो जनता होगी नाराज”, उप नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित,,,

हरिद्वार। ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित नगर निगम बोर्ड की बैठक में भारी हंगामा देखने को मिला। विभिन्न मुद्दों पर पार्षदों के कड़े विरोध और गतिरोध के चलते बैठक को अंततः स्थगित करना पड़ा। बैठक की शुरुआत में शासन द्वारा नामित पार्षद सतविंदर सिंह, आकाश शर्मा, संदीप शर्मा, ममता गुप्ता सहित कुल 12 पार्षदों को पद की शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण के तत्काल बाद पार्षदों ने जनसमस्याओं और विकास कार्यों की अनदेखी को लेकर तीखे तेवर अख्तियार कर लिए।
🔴 पिछले कार्यों की अनदेखी पर भड़के पार्षद, फाड़े प्रस्ताव

सदन में कांग्रेस पार्षदों ने पिछले पारित प्रस्तावों पर अब तक धरातल पर काम न होने को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। पार्षद हिमांशु गुप्ता, सुनील कुमार और सोहित सेठी सहित अन्य पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब पुराने स्वीकृत विकास कार्यों पर ही अमल नहीं हो रहा है, तो फिर नए प्रस्ताव पास करने का क्या औचित्य है। विरोध स्वरूप कांग्रेस पार्षदों ने सदन में प्रस्तावों की प्रतियां फाड़ दीं और उन्हें जलाकर विरोध दर्ज कराया।
पार्षद कृतिका सिंह ने आरोप लगाया कि पिछली बैठकों में मंजूर हुए विकास कार्यों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पार्षद एकता अरोड़ा ने भी शहर में बंदरों की बढ़ती समस्या को उठाते हुए कहा कि इस पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
🔴 मनसा देवी रोपवे टेंडर और भुगतान पर उठे सवाल
बैठक में भाजपा पार्षद भूपेंद्र कुमार ने मनसा देवी रोपवे को लेकर नगर निगम के रवैये पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि निगम को मनसा देवी रोपवे का टेंडर आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, बल्कि इसके लिए खुला (ओपन) टेंडर आमंत्रित किया जाना चाहिए ताकि देश भर की सभी योग्य रोपवे कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का अवसर मिले और निगम को अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त हो सके।
इसके अलावा, पार्षद अनुज सिंह, भूपेंद्र कुमार और सत्येंद्र ने उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि उप नगर आयुक्त ने सैनिटाइजेशन सेल से करीब दो करोड़ रुपये के काम करवा दिए, जबकि निर्माण विभाग के पास पूर्व से ही कई ठेकेदारों के कार्य निर्धारित हैं। पार्षदों का आरोप था कि कई ठेकेदारों को नियमों को दरकिनार कर भुगतान भी कर दिया गया।
🟢 अधिकारियों की कार्यशैली पर मेयर ने जताई नाराजगी
हंगामे के बीच महापौर किरण जैसल ने स्पष्ट लहजे में कहा कि निगम में पार्षदों का कार्यकाल डेढ़ वर्ष बीत चुका है, लेकिन अधिकारी पार्षदों और जन प्रतिनिधियों की बात नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने दो-टूक कहा कि अधिकारी यदि पार्षद और जन प्रतिनिधियों के काम नहीं करेंगे और जनता के काम रुकेंगे, तो लोगों की नाराजगी स्वाभाविक है। इस दौरान निगम के पार्षद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट दिखाई दिए। इस विरोध प्रदर्शन में महावीर वशिष्ठ, कृतिका सिंह, सुमित त्यागी, अरशद ख्वाजा, नौमान अंसारी समेत अन्य पार्षदों ने भी समर्थन दिया।
🟢 नई तारीख की घोषणा जल्द
सदन में बढ़ते हंगामे और दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद नगर आयुक्त नंदन कुमार ने घोषणा की कि रोपवे प्रकरण में जो भी निर्णय होगा, वह नियमानुसार लिया जाएगा और पार्षदों की राय के अनुसार ही आगे टेंडर प्रक्रिया की जाएगी। वर्तमान स्थिति को देखते हुए बोर्ड बैठक को स्थगित कर दिया गया है तथा इसकी अगली तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
