उत्तराखंड नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास, देहरादून में वंचित और अनाथ बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण

देहरादून। राजधानी के कौलागढ़ में स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास उन बच्चों के लिए एक नया और सुरक्षित ठिकाना बनने जा रहा है, जिन्होंने अपने माता-पिता का साया खो दिया है या जो गंभीर आर्थिक और सामाजिक मजबूरियों का सामना कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन और निर्देशों के तहत इस छात्रावास को आधुनिक और सुविधाजनक रूप दिया जा रहा है, ताकि यहां रहने वाले बच्चों को एक बेहतर पारिवारिक माहौल और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।
🟢 आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा छात्रावास
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों के जीवन को सुगम बनाने के लिए छात्रावास की छत पर 10 केवीए क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर दिया गया है। इसके साथ ही, कमरों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगभग 10 कूलर उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें शीघ्र ही स्थापित किया जाएगा। वहीं, बच्चों की पढ़ाई, बैठकों और सामूहिक आयोजनों के लिए एक नए हॉल के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिसके लिए टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं।
🟢 किन बच्चों को मिलेगा यहां प्रवेश?

लगभग 100 बच्चों की क्षमता वाले इस आवासीय परिसर में 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आश्रय देने की योजना है। इस पहल के प्रमुख लाभार्थी निम्नलिखित वर्ग होंगे:
- अनाथ एवं निराश्रित बच्चे
- अत्यंत निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चे
- विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चे
- कूड़ा बीनने और भिक्षावृत्ति में लिप्त रहे बच्चे
- अल्पसंख्यक एवं शहरी वंचित वर्ग के जरूरतमंद बच्चे
🟢 शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, प्राधिकरण बुनियादी विकास कार्यों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। इस छात्रावास का मुख्य उद्देश्य केवल आवास और भोजन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि इन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाना और आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार और प्रशासन के इन मिले-जुले प्रयासों से वंचित वर्ग के बच्चों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव आने की पूरी उम्मीद है।
