भारत में सरकार की इथेनॉल नीति से लगातार चीनी की बढ़ती महंगाई पर अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर तीखा हमला,,,,,

दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक [Arvind Kejriwal](cite: 1.1.1) ने देश में चीनी की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी और उसकी किल्लत के लिए केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि गन्ने के रुख को इथेनॉल उत्पादन की तरफ मोड़े जाने के कारण चीनी के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है।
🔴 महंगाई और दामों में भारी उछाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह दावा किया है कि नीतिगत खामियों के चलते महज 17 दिनों के भीतर ही चीनी के दाम 46 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर सीधे 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि इस अचानक आए संकट के कारण आम उपभोक्ताओं को रसोई के बजट में भारी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है।
🔴 विदेशी मुद्रा और आयात पर विडंबना
केंद्र सरकार के इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचेगी, उन्होंने कहा कि अब स्थिति इसके उलट हो गई है। देश में चीनी की भारी कमी पैदा होने के कारण अब सरकार को उसी विदेशी मुद्रा का उपयोग विदेशों से चीनी आयात करने के लिए करना पड़ेगा।
🔴 वाहनों के प्रदर्शन और माइलेज पर असर
Arvind Kejriwal ने नीति की आलोचना करते हुए यह भी आरोप लगाया कि ई20 (E20) यानी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन और उनके माइलेज पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता एक तरफ तो महंगे ईंधन और वाहनों की समस्याओं से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ उसे आसमान छूती कीमतों पर चीनी खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
🔴 अदूरदर्शी फैसलों पर सवाल
अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के इन कदमों को अदूरदर्शी करार दिया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को यह आकलन पहले ही कर लेना चाहिए था कि यदि बड़े पैमाने पर गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जाएगा, तो देश में चीनी की घरेलू मांग और उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
