उत्तराखंड में यहां लोगों को 15 अगस्त को अंधेरे से मिलेगी आजादी, चीन सीमा से 35 किमी दूर उत्तराखंड के इन गांवों में पहली बार जलेगी बिजली,,,

देहरादून/पिथौरागढ़: देश जब इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाएगा, तब भारत-चीन सीमा के पास बसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी स्थित माइग्रेशन गांव इतिहास रचने जा रहे हैं। आजादी के 78 साल बाद पहली बार चीन सीमा से 35 से 40 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित रडगाड़ी और बुगडियार गांव बिजली की रोशनी से जगमगा उठेंगे। इन सीमांत गांवों तक बिजली की लाइन बिछाने के साथ ही ट्रांसफार्मर भी स्थापित कर दिए गए हैं, और स्वतंत्रता दिवस पर इसके औपचारिक शुभारंभ की तैयारी पूरी कर ली गई है।
🟢 अभी तक लालटेन और ढिबरी के सहारे कट रही थीं रातें
गर्मियों के मौसम में मुनस्यारी के निचले इलाकों से जनजाति समुदाय के ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ रड़गाड़ी और बुगडियार पहुंचते हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अब तक इन गांवों में बिजली नहीं पहुंच पाई थी, जिसके कारण ग्रामीणों को अपनी रातें ढिबरी, लालटेन, मोमबत्ती और सोलर लाइट के सहारे गुजारनी पड़ती थीं। मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मसक्तू ने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से इन क्षेत्रों को बिजली सेवा से जोड़ने की पुरजोर मांग कर रहे थे।
🟢 यूपीसीएल ने पूरी की चुनौती, सेना को भी मिलेगा लाभ
यूपीसीएल मुनस्यारी के एसडीओ सद्दाम अली ने जानकारी दी कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद रड़गाड़ी और बुगडियार तक बिजली लाइन बिछा दी गई है। इस बहुप्रतीक्षित सुविधा से न केवल स्थानीय ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि भारतीय सेना, आईटीबीपी (ITBP) और बीआरओ (BRO) को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बता दें कि बुगडियार सुरक्षा बलों का एक मुख्य केंद्र है, जहां अब तक पहरा देने के लिए सुरक्षा बलों को जनरेटर या सोलर ऊर्जा पर निर्भर रहना पड़ता था।
🟢 चीन की सीमांत रणनीति और भारत का विकास
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन ने पिछले एक दशक में अपनी सीमा से सटे क्षेत्रों में ‘मॉडल विलेज’ रणनीति के तहत चौबीसों घंटे बिजली, हाई-स्पीड इंटरनेट, पक्की सड़कें और दो-मंजिला पक्के मकान जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की हैं। इसके मुकाबले भारत ने भी अब सीमांत क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
🟢 इन गांवों में भी जल्द पहुंचेगी बिजली
रडगाड़ी और बुगडियार के बाद अब प्रशासन और ऊर्जा निगम का फोकस अन्य माइग्रेशन गांवों पर है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लीलम से करीब 62 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जा रही है, जिस पर 21 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इस योजना के पूरा होने के बाद मिलम, लास्पा, मर्तोली, बल्जू, बुर्फू, मापा, टोला और गनघर जैसे सीमांत माइग्रेशन गांवों को भी जल्द ही निर्बाध बिजली आपूर्ति से जोड़ दिया जाएगा।
