उत्तराखंड सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर प्रशासन का बड़ा चाबुक, हल्द्वानी में 5 और कोचिंग सेंटर सील, अब तक 12 पर एक्शन,,,,

हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ जिला प्रशासन और जिला विकास प्राधिकरण का हंटर लगातार चल रहा है। सुरक्षा मानकों और फायर सेफ्टी नियमों का घोर उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सोमवार को एक बार फिर बड़ी गाज गिरी है। नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण (NDAA) और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न कोचिंग सेंटरों में औचक छापेमारी करते हुए व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां मिलने पर पांच और कोचिंग सेंटरों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। इस ताजा कार्रवाई के बाद शहर में अब तक सील किए जा चुके कोचिंग संस्थानों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
“लखनऊ अग्निकांड के बाद कुमाऊं मंडल में जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम की ताबड़तोड़ कार्रवाई से मचा हड़कंप”
प्राप्त विवरण के अनुसार, जिला विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष कुमार और सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी के संयुक्त नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने शहर के कई व्यावसायिक परिसरों में चल रहे कोचिंग सेंटरों की बारीकी से पड़ताल की। जांच टीम जब इन संस्थानों के भीतर पहुंची, तो वहां छात्रों की सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही देखने को मिली। कई संस्थानों के पास न तो फायर विभाग की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) थी और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी एग्जिट (निकास द्वार) की कोई व्यवस्था की गई थी। इसके अतिरिक्त, भवनों के तकनीकी सुरक्षा मानकों में भी कई तरह की कमियां पाई गईं, जिसके बाद अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए पांचों केंद्रों को मौके पर ही सील कर दिया।
🔴 जांच में उजागर हुईं ये गंभीर लापरवाही और खामियां
- फायर एनओसी का अभाव: अधिकांश संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग द्वारा जारी अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था।
- इमरजेंसी एग्जिट न होना: किसी भी अप्रिय घटना या आग लगने की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई वैकल्पिक निकास मार्ग नहीं बनाया गया था।
- सुरक्षा मानकों का उल्लंघन: भवनों की क्षमता से अधिक बच्चों को बेहद संकरी जगहों पर बैठाकर पढ़ाया जा रहा था।
- भवन सुरक्षा प्रमाणपत्रों की कमी: ढांचागत और तकनीकी रूप से भवन छात्रों के व्यावसायिक उपयोग के लिए पूरी तरह स्वीकृत नहीं पाए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इस हादसे से सबक लेते हुए कुमाऊं क्षेत्र के सभी शिक्षण और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था का सघन ऑडिट किया जा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी ने कहा कि किसी भी कोचिंग संस्थान या शिक्षण केंद्र में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बच्चों की जान को जोखिम में डालकर मुनाफा कमाने वाले संचालकों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का सख्त रुख जारी रहेगा।
गौरतलब है कि हल्द्वानी में अवैध और असुरक्षित रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों पर यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी संयुक्त टीम द्वारा नियमों का सरेआम उल्लंघन करने वाले 7 बड़े कोचिंग सेंटरों को सील किया जा चुका है। लगातार हो रही इस सीलिंग अभियान से शहर के अन्य कोचिंग संचालकों और व्यावसायिक भवन स्वामियों में हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सभी संचालक अविलंब अपने संस्थानों में फायर एनओसी, बिल्डिंग फिटनेस सर्टिफिकेट और आपातकालीन निकास सहित सभी अनिवार्य सुरक्षा मानकों को शत-प्रतिशत पूरा कर लें, अन्यथा बिना किसी पूर्व सूचना के उनके खिलाफ भी दंडात्मक और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
