उत्तराखंड में समय से पहले चुनाव की सुगबुगाहट, केदारनाथ सोने और राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर गरमाई सियासत,,,

देहरादून। देश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों तीन राज्यों—उत्तराखंड, पंजाब और मेघालय—में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने की चर्चाएं बेहद तेज हैं। तय समय के अनुसार ये चुनाव फरवरी 2027 में होने थे, लेकिन प्रशासनिक कारणों, सर्दियों की बर्फबारी और वर्ष 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण के टकराव को देखते हुए इन्हें नवंबर 2026 में ही कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस बीच, चुनावी आहट मिलते ही विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट (विजुअल फाइल 564340.jpg) तेजी से वायरल हो रही है, जिसने देवभूमि उत्तराखंड से लेकर पंजाब तक की राजनीतिक तपिश को और बढ़ा दिया है।
🟢 सोशल मीडिया पर तीखे हमले: धार्मिक मुद्दों पर घेरे जा रहे ‘चुनावी समीकरण’
संभावित चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार पर तीखे जुबानी और डिजिटल हमले शुरू कर दिए हैं। ‘कैश खुराना’ (Cash Khurana) नामक एक सोशल मीडिया हैंडल द्वारा साझा की गई एक पोस्ट (564340.jpg) में सीधे तौर पर सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाए गए हैं।
इस पोस्ट में लिखा गया है:
“पहले केदारनाथ जी का सोना खाया अब राम जी का चंदा गायब कर दिया, शर्म करो भाजपा की चोरों वाली सरकार।”
यह हमला साफ तौर पर दर्शाता है कि आगामी चुनावों में विपक्ष और विरोधी धड़े उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में सोने की परत चढ़ाने के विवाद और राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में जहां धार्मिक आस्थाएं चुनाव में बड़ी भूमिका निभाती हैं, वहीं इस प्रकार के आरोप भाजपा की ‘रणनीति’ को प्रभावित कर सकते हैं।
🟢 क्यों समय से पहले चुनाव कराने की है चर्चा?
राजनीतिक सूत्रों और विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा इन तीन राज्यों में मतदान को समय से 3-4 महीने पहले खिसकाने के पीछे दो व्यावहारिक कारण बताए जा रहे हैं:
- सर्दियों और पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक चुनौती: जनवरी और फरवरी के महीनों में उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी होती है। इसके कारण पोलिंग पार्टियों को भेजने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने में भारी दिक्कतें आती हैं। नवंबर का महीना इसके लिए अधिक अनुकूल माना जा रहा है।
- राष्ट्रीय जनगणना 2027 का टकराव: फरवरी 2027 से देश में राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होने की संभावना है। एक साथ इतनी बड़ी प्रशासनिक मशीनरी को जनगणना और 5 राज्यों के चुनाव में तैनात करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
🟢 राजनीतिक दलों की तैयारियां: कौन कहाँ खड़ा है?
भले ही चुनाव आयोग ने तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब में दिए गए बयानों और सोशल मीडिया पर बढ़ते हमलों ने सभी दलों को ‘इलेक्शन मोड’ में ला दिया है।
- आम आदमी पार्टी (AAP): पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के चेहरे को आगे रखकर पार्टी ने बठिंडा से अपने अभियान की शुरुआत कर दी है और अरविंद केजरीवाल लगातार मान सरकार की ‘ईमानदार छवि’ का कार्ड खेल रहे हैं।
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): बीजेपी इन सभी दावों को फिलहाल महज कयासबाजी बता रही है, लेकिन अंदरूनी तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पार्टी की रणनीतिक बैठकें शुरू हो चुकी हैं।
- कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस फिलहाल अपने संगठन को मजबूत करने और सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार के मुद्दों (जैसा कि फाइल संलग्न चित्र पर परिलक्षित है) को उठाकर सरकार विरोधी माहौल तैयार करने में जुटी है।
