उत्तर प्रदेश के लखनऊ कोचिंग अग्निकांड से देश में शोक की लहर, 15 छात्रों की मौत, उच्च स्तरीय जांच शुरू, पीएम, राष्ट्रपति और सीएम योगी ने जताया शोक,,,,

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर को हुए एक भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में स्थित कोचिंग संस्थान में लगी इस भयावह आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस हृदयविदारक हादसे के बाद जहां देशभर में शोक की लहर है, वहीं कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
🔴 दोपहर 3 बजे काल बनी आग, जान बचाने के लिए छात्रों ने लगाई छलांग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में सोमवार दोपहर करीब 3:00 बजे अचानक आग भड़क उठी। इस इमारत के निचले हिस्से में एक पेट शॉप (Pet Shop) संचालित थी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर कोचिंग और एनिमेशन सेंटर चल रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपरी मंजिल पर मौजूद छात्रों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते पूरी इमारत घने और जहरीले धुएं के गुबार में तब्दील हो गई। जान बचाने की जद्दोजहद में कुछ छात्रों ने इमारत से नीचे छलांग लगा दी, जबकि कई छात्र अंदर ही धुएं और लपटों की चपेट में आ गए।
🔴 14 दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा, दीवार तोड़कर चला रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए मोर्चा संभाला। राहत और बचाव कार्य के लिए 14 दमकल वाहनों और हाइड्रोलिक सीढ़ियों की मदद ली गई। इमारत के भीतर फैले घने और काले धुएं के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा रहा। फायर कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बगल की इमारत की दीवार तोड़ी और गीले कंबलों के सहारे ऊपरी मंजिलों तक पहुंचकर फंसे हुए छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हादसे की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि इस भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की असमय मृत्यु हुई है। वहीं, चार गंभीर रूप से घायल छात्रों का इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जिन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
🔴 घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे सीएम योगी; पीड़ितों के लिए मुआवजे का एलान
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए और वे सीधे घटनास्थल तथा अस्पताल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। इस दौरान हादसे में घायल हुई इमारत की एक महिला कर्मचारी ने मुख्यमंत्री को आपबीती भी सुनाई।
मुख्यमंत्री ने इस त्रासदी में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने घटना की उच्चस्तरीय जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
🔴 देर शाम पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
लखनऊ के सांसद और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी देर शाम दिल्ली से सीधे लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जाना। राजनाथ सिंह ने इस हादसे को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि सुरक्षा में कोताही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🔴 देश के शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष ने जताया गहरा दुख
इस दर्दनाक हादसे पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा शोक प्रकट किया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने भी इस घटना को बेहद दुखद बताया है। वहीं, विपक्षी दलों के नेताओं ने दुख जताते हुए हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
🔴 आग के कारणों की उच्च स्तरीय जांच शुरू, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि आग सबसे पहले पहली मंजिल से शुरू हुई और धुएं ने पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आग लगने का मुख्य कारण क्या था और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।
इस हादसे ने एक बार फिर देशभर के कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर ‘फायर सेफ्टी’ (अग्नि सुरक्षा) मानकों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवन में आपातकालीन निकास और अग्नि शमन के पुख्ता इंतजाम होते, तो इतनी बड़ी जनहानि को समय रहते टाला जा सकता था।
