उत्तराखंड हरिद्वार बाघ शिकार मामले में विभाग ने बड़ी लापरवाही पर रेंजर विनय राठी सहित फॉरेस्ट गार्ड को किया निलंबित,,,,

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग में दो बाघों के शिकार के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर श्यामपुर रेंज के रेंजर विनय कुमार राठी और संबंधित फॉरेस्ट गार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 25 मई 2026 को जारी निलंबन आदेश के अनुसार, रेंजर राठी को हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है।
इस कड़ी कार्रवाई के बाद हरिद्वार से लेकर देहरादून तक वन महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
🔴 जहर देकर किया गया था शिकार, पंजे भी गायब
दरअसल, बीते दिनों हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज के अंतर्गत सजनपुर बीट में दो बाघों के शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि शिकारियों ने बाघों को मारने के लिए जहर का इस्तेमाल किया था। गंभीर बात यह है कि शिकारी मृत बाघों के पंजे भी काटकर ले गए, जिन्हें वन विभाग अब तक बरामद नहीं कर पाया है। इस मामले में विभाग ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
मुख्य बिंदु: क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी और गश्त व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आने के बाद रेंज स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए यह निलंबन आदेश जारी किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
🔴 राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की हो सकती है एंट्री
दो बाघों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी के इस गंभीर मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की एक विशेष टीम जल्द ही मामले की जांच के लिए उत्तराखंड पहुंच सकती है।
🔴 विवादों और सुरक्षा के घेरे में हरिद्वार वन प्रभाग
हरिद्वार वन प्रभाग पिछले कुछ समय से लगातार वन्यजीव अपराधों और सुरक्षा में चूक को लेकर सुर्खियों में रहा है।
- हाथियों की मौत: पिछले 8 महीनों में इस प्रभाग में 4 से अधिक हाथियों की मौत हो चुकी है।
- सांपों के जहर की तस्करी: हाल ही में इसी डिवीजन में सांपों के जहर की तस्करी का एक बड़ा मामला भी उजागर हुआ था।
चूंकि यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है और एक प्रमुख वन्यजीव कॉरिडोर है, इसलिए यहाँ मानव-वन्यजीव संघर्ष और शिकारियों की सक्रियता हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है।
🟢 आगामी महाकुंभ को लेकर बढ़ी चिंताएं
इस घटना ने भविष्य में हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ मेले की तैयारियों के मद्देनजर भी वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। महाकुंभ के दौरान वन क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। ऐसे में सुरक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
वन विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अभी शुरुआती स्तर की है। मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है, और यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता या लापरवाही सामने आती है, तो आगे भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
