उत्तराखंड वन विभाग में मचा हड़कंप, हरिद्वार वन गुर्जरों ने ज़हर देकर मार डाले दो युवा बाघ, पैर काटकर शव छिपाए एक गिरफ्तार और तीन फरार,,,,,

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग से एक बेहद झकझोर देने वाली और गंभीर घटना सामने आई है। श्यामपुर रेंज के सजनपुर बीट के जंगलों में महज़ 24 घंटे के भीतर दो राष्ट्रीय पशुओं (बाघ और बाघिन) के शव मिलने से वन विभाग सहित प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। दोनों मृत बाघ भाई-बहन बताए जा रहे हैं, जिनकी उम्र करीब दो वर्ष है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि वन गुर्जरों ने अपनी भैंस के शिकार का बदला लेने और अंगों की तस्करी के उद्देश्य से दोनों बाघों को ज़हर देकर मौत के घाट उतारा है। इस सनसनीखेज मामले में वन विभाग ने एक आरोपी वन गुर्जर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि तीन अन्य साथी फिलहाल फरार हैं।
🔴 घटनाक्रम- कैसे सामने आया यह क्रूर शिकार?

- 18 मई (सोमवार शाम): हरिद्वार वन विभाग की टीम को मुखबिर से वन गुर्जरों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। श्यामपुर रेंज अंतर्गत सजनपुर बीट (कम्पार्टमेंट संख्या 9) में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान एक दो वर्षीय नर बाघ का शव बरामद हुआ। बाघ के चारों पैर कटे हुए थे, जबकि उसकी खाल और दांत सुरक्षित थे। मौके से एक मृत भैंस भी मिली।
- 19 मई (मंगलवार दिन): जांच को आगे बढ़ाते हुए जब टीम ने घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर सर्चिंग अभियान चलाया, तो एक गदेरे (बरसाती नाले) में पत्तों से छिपाकर रखी गई मादा बाघ (बाघिन) का शव भी बरामद हो गया। आरोपियों ने इस बाघिन के भी पैर काट दिए थे।
🔴 शिकार का तरीका- भैंस की लाश पर छिड़का खतरनाक ज़हर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दो दिन पहले इन बाघों ने वन गुर्जरों की एक भैंस का शिकार किया था। इसके बाद आरोपियों ने बदला लेने और वन्यजीव तस्करी की साजिश रची। उन्होंने मृत भैंस के मांस पर घातक जहरीला पदार्थ छिड़क दिया।
जैसे ही दोनों युवा बाघों ने भैंस के मांस को खाया, ज़हर के असर से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मौत के बाद आरोपियों ने बाघों के पैर काट दिए और रात के अंधेरे में उनकी खाल और दांत निकालकर बाजार में बेचने की फिराक में थे। हालांकि, इससे पहले कि वे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते, वन विभाग ने दबिश दे दी।
🔴 मां पर मंडराया संकट- सर्च ऑपरेशन जारी
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, दो से तीन साल की उम्र तक बाघ के बच्चे अपनी मां के साथ ही रहते हैं और शिकार करना सीखते हैं। इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि दोनों मृत बच्चों की मां भी इसी इलाके में होगी। वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व का प्रशासन इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि कहीं मां ने भी वह जहरीला मांस न खाया हो। फिलहाल, मां की सुरक्षित तलाश के लिए सघन कॉम्बिंग और सर्च अभियान जारी है।
🔴 वन विभाग की लापरवाही और अवैध डेरों पर सवाल
जिस क्षेत्र में इस गंभीर वारदात को अंजाम दिया गया, वह राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग की सीमा के बीच का बफर जोन है। यह इलाका बाघों और हाथियों की आवाजाही के लिए ‘अति संवेदनशील’ माना जाता है।
स्थानीय सूत्रों और पूर्व की शिकायतों के अनुसार, श्यामपुर रेंज के सिद्ध श्रोत और खारा क्षेत्र में वन गुर्जरों ने तय परमिट की क्षमता से अधिक डेरे जमा लिए हैं। वन्यकर्मियों की कथित लापरवाही के चलते ये गुर्जर अपने मवेशियों को चराने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट के अंदर तक ले जाते हैं, जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) बढ़ रहा है।
🔴 कार्रवाई एक जेल भेजा गया बाकी तीन की तलाश तेज
इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है:
- गिरफ्तार आरोपी: आलम उर्फ फम्मी (पुत्र शमशेर), निवासी- गुर्जर डेरा, श्यामपुर। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
- फरार आरोपी: आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक, और जुप्पी।
वन विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें भी कानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा। इस घटना ने उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक के वन्यजीव संरक्षण बोर्डों को अलर्ट कर दिया है।
🟢 वन विभाग की कार्रवाई में ये अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
इस बड़े और संवेदनशील मामले के सामने आने के बाद वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर मुस्तैदी दिखाई। शवों को बरामद करने, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और शुरुआती तफ्तीश की इस पूरी कार्रवाई में मुख्य रूप से शामिल रहे:
- पूनम कैंथोला (उप प्रभागीय वनाधिकारी)
- डॉ. अमित ध्यानी (वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी)
- विनय राठी (क्षेत्राधिकारी)
- भूपेंद्र बिष्ट (वन दरोगा)
- करुण सैनी (वन आरक्षी)
