उत्तराखंड सिडकुल में 95% श्रमिक ठेकेदारी प्रथा के चंगुल में, न्यूनतम वेतन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर: वरुण बालियान,,,,,
हरिद्वार। सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की बदहाली और शोषण का मुद्दा अब गरमाने लगा है। कांग्रेस नेता वरुण बालियान ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सिडकुल क्षेत्र में करीब 95 प्रतिशत श्रमिक ठेकेदारी प्रथा के तहत काम करने को मजबूर हैं। अपने बुनियादी हक और वेतन बढ़ोतरी जैसी जायज मांगों को लेकर इन मजदूरों को आज सड़कों पर उतरकर संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए वरुण बालियान ने कहा कि सिडकुल में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
”मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है क्योंकि उनके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि सदन में उनकी आवाज उठाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अगर जनप्रतिनिधि समय रहते इन मुद्दों को गंभीरता से लेते, तो आज कर्मचारियों को सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता।”
सत्ता के दुरुपयोग और शोषण का आरोप
बालियान ने सीधा आरोप लगाया कि क्षेत्र में ठेकेदार, कंपनियां और कुछ रसूखदार जनप्रतिनिधि आपस में मिलकर सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं और गरीब मजदूरों का खुलकर शोषण किया जा रहा है। कंपनियां अपने मनमाने नियमों का हवाला देकर श्रमिकों का उत्पीड़न कर रही हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि श्रम विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को इस पूरी स्थिति की जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय रोजगार के नियमों की अनदेखी
प्रेसवार्ता में वरुण बालियान ने सिडकुल स्थापना के समय हुए समझौतों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि स्थापना के वक्त यह सहमति बनी थी कि उद्योगों में 70 प्रतिशत स्थानीय और 30 प्रतिशत बाहरी लोगों को रोजगार दिया जाएगा। लेकिन आज इस नियम को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सिडकुल की बड़ी कंपनियों के ‘कंपनी बेस’ कर्मचारी सड़कों पर इसलिए नहीं दिख रहे क्योंकि उन्हें सुरक्षित नियुक्तियां मिली हैं, जबकि ठेका प्रथा वाले मजदूर बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं।
प्रमुख मांगें और आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेता ने मजदूरों के सम्मानपूर्वक जीवन यापन के लिए निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से उठाईं:
- सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन का कड़ाई से पालन हो (जो वर्तमान में नहीं मिल रहा है)।
- श्रमिकों को निर्धारित वेतन के साथ-साथ ओवरटाइम और बोनस का ससमय भुगतान किया जाए।
- ठेकेदारी प्रथा के नाम पर हो रहा मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न तुरंत बंद हो।
बालियान ने श्रमिकों को आगाह करते हुए कहा कि कुछ ताकतें मजदूरों के इस जायज आंदोलन को भटकाने का प्रयास कर रही हैं, जिससे उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय स्तर पर मजदूरों को जल्द न्याय नहीं मिला, तो इस लड़ाई को प्रदेश की राजधानी देहरादून तक ले जाया जाएगा और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रेसवार्ता में ये रहे मौजूद
इस दौरान युवा इंटक के जिला अध्यक्ष महिपाल सिंह, चंद्रेश कुमार, अशोक गिरी, पूर्व पार्षद इसरार सलमानी, पार्षद विवेक भूषण विक्की, अंकित चौहान, अयान, रियाज अंसारी, परितोष त्यागी, दिव्यांश अग्रवाल, लक्ष्य चौहान, कैश खुराना, जावेद खान, विवेक, विकास कुमार और राज किशोर सहित कई कार्यकर्ता व श्रमिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

