उत्तराखंड में बनेगा देश का पहला ‘ग्रीन रोपवे’ ऋषिकेश-नीलकंठ प्रोजेक्ट, वन्यजीवों को मिलेगी सुरक्षा और यात्रियों को सुगम यातायात,,,

देहरादून। योगनगरी ऋषिकेश से प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनने वाला महत्वाकांक्षी रोपवे प्रोजेक्ट अब केवल श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का एक अनूठा मॉडल बनने जा रहा है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की ओर से मिली मंजूरी के बाद, राज्य सरकार इस परियोजना को देश के पहले ‘ग्रीन रोपवे’ के रूप में विकसित करने की तैयारी में है।
🟢 दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर बनेगा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने इस परियोजना को हरी झंडी देते हुए यह स्पष्ट शर्त रखी है कि रोपवे निर्माण के कारण क्षेत्र के वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही में कोई व्यवधान नहीं आना चाहिए। इसी निर्देश के अनुपालन में, उत्तराखंड सरकार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर नीलकंठ महादेव रोपवे प्रोजेक्ट के तहत एक विशेष वन्यजीव कॉरिडोर (वाइल्डलाइफ कॉरिडोर) विकसित करेगी। इस तकनीक के माध्यम से रोपवे के नीचे से हाथी, तेंदुआ, हिरण और अन्य वन्यजीव बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने पारंपरिक मार्गों से सुरक्षित रूप से गुजर सकेंगे।
🟢 ₹450 करोड़ की योजना ने पकड़ी रफ्तार
ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोपवे प्रोजेक्ट अब तेजी से धरातल पर उतरने की ओर अग्रसर है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति के बाद जिला प्रशासन ने परियोजना के लिए आवश्यक एक हेक्टेयर भूमि उपलब्ध करा दी है। इसके साथ ही, भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) की अंतिम रिपोर्ट आते ही वन भूमि पर भी सरकार को कब्जा मिल जाएगा। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत वाली यह दूरगामी योजना बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करेगी।
🟢 6.5 किलोमीटर की दूरी अब मात्र 15 मिनट में
सचिव आवास आर राजेश कुमार के अनुसार, इस 6.5 किलोमीटर लंबे रोपवे के क्रियान्वयन के बाद श्रद्धालुओं का सफर बेहद आसान हो जाएगा। वर्तमान में श्रद्धालुओं को ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव तक पहुंचने के लिए लगभग 30 किलोमीटर का पहाड़ी सड़क मार्ग तय करना पड़ता है या फिर करीब 9 किलोमीटर का कठिन पैदल ट्रैक पार करना होता है। इस रोपवे के चालू होने से यह दूरी सिमटकर मात्र 15 मिनट की रह जाएगी। इस रोपवे का मार्ग ऋषिकेश के तपोवन से शुरू होकर त्रिवेणीघाट होते हुए सीधे नीलकंठ महादेव मंदिर तक जाएगा।
🔴 राजाजी टाइगर रिजर्व का संवेदनशील क्षेत्र
यह पूरा रोपवे मार्ग राजाजी टाइगर रिजर्व के बेहद संवेदनशील वन क्षेत्र और गंगा नदी के आसपास फैले घने जंगलों के ऊपर से होकर गुजरेगा। यह कॉरिडोर मुख्य रूप से एशियाई हाथियों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाथियों के अलावा इस क्षेत्र में तेंदुआ, सांभर, चीतल, काकड़, जंगली सूअर, नीलगाय, घुरल और लंगूर बड़ी संख्या में निवास करते हैं, जबकि कुछ हिस्सों में बाघों की सक्रियता भी देखी गई है। यही कारण है कि वन्यजीवों की सुरक्षा को केंद्र में रखकर इस परियोजना में विशेष पर्यावरणीय सतर्कता बरती जा रही है।
