उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड में तेज हुई सियासी हलचल, कांग्रेस में 12 नए नेताओं की ज्वॉइनिंग की तैयारी,,,,

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए दलबदल की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने दूसरे चरण की ज्वॉइनिंग की तैयारी पूरी कर ली है और जल्द ही 12 नए नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार पार्टी ने कुल 18 नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराने की योजना बनाई है। इनमें से 6 नेताओं की पहले ही पार्टी में एंट्री हो चुकी है, जबकि शेष 12 नेताओं की सूची हाईकमान को भेज दी गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन नेताओं की औपचारिक ज्वॉइनिंग कराई जाएगी।
दरअसल, बीते 28 मार्च को दिल्ली में कांग्रेस ने ज्वॉइनिंग का पहला चरण पूरा किया था। इस दौरान पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक नारायण पाल, पूर्व विधायक भीमलाल आर्य (घनसाली), रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल, मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता और लाखन सिंह नेगी ने कांग्रेस का दामन थामा था। इन नेताओं में से अधिकांश पहले भाजपा से जुड़े रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस इसे राजनीतिक रूप से अपनी मनोवैज्ञानिक बढ़त मान रही है।
हालांकि इस ज्वॉइनिंग को लेकर कांग्रेस के भीतर कुछ समय के लिए अंदरूनी हलचल भी देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अवकाश लेने की खबर के बाद पार्टी में चर्चाएं तेज हो गई थीं। बताया गया कि कुछ नेताओं की ज्वॉइनिंग को लेकर असंतोष की स्थिति बनी थी, लेकिन बाद में वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से मामला शांत करा लिया गया।
इस बीच कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का आगामी उत्तराखंड दौरा काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके दौरे के दौरान ही बचे हुए 12 नेताओं में से कई की औपचारिक ज्वॉइनिंग करवाई जा सकती है, जिससे प्रदेश में कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा।
वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का दावा है कि भाजपा के कई बड़े नेता भी कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर बढ़ा-चढ़ाकर दावे नहीं करना चाहती। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और भाजपा के प्रभाव को चुनौती देने के लिए प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
