उत्तराखंड अंकिता भंडारी हत्याकांड मे CBI जांच आदेश के बाद प्रदेश मे सियासी समीकरण बदलने की उम्मीद, विपक्ष की रणनीति को लग सकता है झटका- ABPINDIANEWS SPECIAL

देहरादून- उत्तराखंड की बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में प्रदेश की जनता के उग्र प्रदर्शन, लगातार विरोध और बढ़ते जनदबाव के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच के आदेश ने राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ ला दिया है। इस फैसले को न केवल पीड़ित परिवार और आम जनता के आक्रोश को शांत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव भी साफ नजर आने लगे हैं।
बीते लंबे समय से अंकिता भंडारी हत्याकांड प्रदेश की राजनीति का सबसे संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दा बना हुआ था। इस मामले को लेकर विपक्ष और स्थानीय राजनीतिक दलों को काफी समय बाद जनसमर्थन मिल रहा था। सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन, रैलियां और सीबीआई जांच की मांग ने सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा। विपक्ष इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक समीकरणों में सत्ता तक पहुंचने के एक मजबूत हथियार के रूप में देख रहा था।
हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बाद राजनीतिक माहौल में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। सरकार के इस निर्णय से विपक्ष के उस मुख्य आरोप को काफी हद तक धारहीन माना जा रहा है, जिसमें निष्पक्ष जांच न होने का सवाल उठाया जा रहा था। अब जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने के बाद सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह मामले में किसी भी स्तर पर पारदर्शिता और न्याय से समझौता नहीं करेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीबीआई जांच के आदेश से विपक्ष और स्थानीय राजनीतिक दलों की वह रणनीति कमजोर पड़ सकती है, जिसके जरिए वे इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच सरकार विरोधी माहौल बनाना चाह रहे थे। वहीं, सत्तारूढ़ दल इसे जनता के दबाव को गंभीरता से लेते हुए लिया गया साहसिक फैसला बता रहा है।
दूसरी ओर, विपक्ष अब भी इस मामले पर सरकार की नीयत और जांच की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। उनका कहना है कि सीबीआई जांच का स्वागत है, लेकिन दोषियों को सख्त सजा और पूरे मामले की निष्पक्षता ही असली कसौटी होगी। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सीबीआई जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका असर प्रदेश की राजनीति पर किस रूप में पड़ता है।
फिलहाल, इतना तय माना जा रहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच का आदेश उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है, जिसने विपक्ष के बढ़ते जनसमर्थन और सत्ता तक पहुंचने के मंसूबों को झटका देने का काम किया है।
कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच का आदेश उत्तराखंड बंद की धार को कुछ हद तक कमजोर कर सकता है, लेकिन जनता की अपेक्षाएं अब जांच के नतीजों और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि 11 जनवरी का बंद किस हद तक असरदार साबित होगा और आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीती मे इसका क्या प्रभाव पड़ेता है ✍️ गौरव चक्रपाणी
