उत्तराखंड में यहाँ लोगो ने शादियों में दिखावा किया बंद, शराब–फास्ट फूड पर रोक, उल्लंघन पर देना होगा भारी जुर्माना,,,,

उत्तराखंड में यहाँ लोगो ने शादियों में दिखावा किया बंद, शराब–फास्ट फूड पर रोक, उल्लंघन पर देना होगा भारी जुर्माना,,,,

उत्तराखंड में यहाँ लोगो ने शादियों में दिखावा किया बंद, शराब–फास्ट फूड पर रोक, उल्लंघन पर देना होगा भारी जुर्माना,,,,

देहरादून: देहरादून जिले के जौनसार-बावर इलाके में समाज सुधार की परंपरा लगातार मजबूत होती जा रही है. अपनी विशिष्ट संस्कृति और सामूहिक निर्णय प्रणाली के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में नवंबर महीने में एक और बड़ा फैसला सामने आया है। खत पट्टी शैली के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों की सामूहिक बैठक में कई महत्वपूर्ण नियम तय किए गए, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएंगे।

🔴 दोहा गांव में बनी सामूहिक सहमति
20 नवंबर को खत पट्टी शैली के गांवों के प्रतिनिधि दोहा गांव में जुटे, जहां सदर स्याणा (मुखिया) राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में विस्तृत चर्चा हुई. बैठक में यह माना गया कि सभी परिवारों को समान अवसर और सम्मान मिले, इसके लिए सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च को सीमित करना जरूरी है।

🔴 शादी–विवाह होंगे सादगीपूर्ण
निर्णयों के अनुसार, अब क्षेत्र के सभी गांवों में होने वाली शादियां तथा अन्य शुभ कार्यक्रम सादगी के साथ किए जाएंगे।

विवाह और मांगलिक आयोजनों में महंगे तोहफे देने–लेने पर रोक रहेगी।

किसी भी कार्यक्रम में शराब और फास्ट फूड परोसना प्रतिबंधित होगा।

इन नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवार पर एक लाख रुपये का दंड लगाया जाएगा और गांव के लोग उस परिवार के समारोहों से दूरी बनाएंगे।

🔴 महिलाओं के लिए नई गाइडलाइन
सादगी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तय किया गया है कि महिलाएं शादी और रयणी भोज जैसे अवसरों पर सिर्फ तीन प्रकार के आभूषण पहनेंगी—नाक की फूली, कान के झुमके और मंगलसूत्र।

🔴 अन्य पारंपरिक व्यवस्थाओं में सुधार
बैठक में कुछ पारंपरिक वस्तु आदान-प्रदान को भी सरल बनाया गया—

शादी में मामा की ओर से केवल बकरा, आटा और चावल देने की परंपरा जारी रहेगी।

विवाहिता बेटी की ओर से अपने मायके वालों को बकरा देने की प्रथा पर रोक लगा दी गई है।

रयणी भोज में मिठाई और फल देने की अनुमति रहेगी, लेकिन चांदी का सिक्का, ड्राई फ्रूट्स और महंगे उपहार नहीं दिए जाएंगे।

🔴 पहले भी लागू हुए थे ऐसे निर्णय
अक्टूबर में कंदाड और इंद्रोली गांवों में भी महिलाओं के आभूषण सीमित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 20 नवंबर को खारसी गांव ने इस नियम को स्वीकार किया, और अब खत पट्टी शैली के अंतर्गत अन्य गांवों ने भी सामूहिक रूप से इसे विस्तारित कर दिया है।

जौनसार-बावर की यह पहल एक बार फिर दर्शाती है कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए यह समुदाय सामाजिक एकरूपता और सरल जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

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