उत्तराखंड चमोली में सिस्टम फेलियर बना मौत की वजह, डंपर की टक्कर से घायल युवक की एंबुलेंस खराब होने पर गई जान,,,,

चमोली: चमोली जिले से लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां सड़क हादसे में घायल युवक को समय पर उपचार नहीं मिल सका और एंबुलेंस के रास्ते में खराब हो जाने से उसकी जान चली गई। यह घटना सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
यह दर्दनाक हादसा रविवार, 1 फरवरी को ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्वालदम के समीप हुआ। जानकारी के अनुसार, 18 वर्षीय मनीष सिंह बाइक से ग्वालदम की ओर जा रहा था। इसी दौरान तलवाड़ी की दिशा से तेज रफ्तार में आ रहे डंपर संख्या UK 14 CA 1921 ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष गंभीर रूप से घायल हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डंपर के टायर युवक की जांघों के ऊपर से गुजर गए, जिससे उसे अत्यधिक चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायल युवक को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्वालदम पहुंचाया। घटना की सूचना मिलते ही थराली थानाध्यक्ष विनोद चौरसिया पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
डॉक्टरों ने युवक की नाजुक हालत को देखते हुए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया। इसके बाद मनीष को 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ, बागेश्वर ले जाया जा रहा था। लेकिन दुर्भाग्यवश, ग्वालदम से लगभग 12 किलोमीटर दूर कंधार कस्बे के पास एंबुलेंस अचानक खराब हो गई और उसका इंजन बंद हो गया।
चालक द्वारा काफी प्रयास के बावजूद एंबुलेंस चालू नहीं हो सकी। मजबूरी में बैजनाथ से दूसरी 108 एंबुलेंस मंगवाई गई। इस दौरान करीब एक घंटे तक घायल युवक एंबुलेंस के अंदर दर्द से तड़पता रहा। जब दूसरी एंबुलेंस मौके पर पहुंची, तब तक मनीष सिंह की मौत हो चुकी थी।
मृतक की पहचान मनीष सिंह पुत्र कैलाश सिंह (उम्र 18 वर्ष), निवासी ग्राम गलाई कंधार, जिला बागेश्वर के रूप में हुई है।
वहीं पुलिस ने दुर्घटना के बाद डंपर को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में ले लिया है। चालक को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। आशंका जताई जा रही है कि वह नशे की हालत में वाहन चला रहा था। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आपात स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी है। एक ओर नशे में वाहन चलाने पर प्रभावी नियंत्रण की कमी सामने आई है, तो दूसरी ओर 108 एंबुलेंस जैसी जीवन रक्षक सेवा की खराब स्थिति ने सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर किया है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, थराली तहसील क्षेत्र में तैनात अधिकांश 108 एंबुलेंस का रखरखाव लंबे समय से संतोषजनक नहीं है। मरीजों को ले जाते समय एंबुलेंस का बीच रास्ते में खराब हो जाना आम समस्या बन चुकी है। लोगों का कहना है कि यदि मनीष को समय पर बैजनाथ अस्पताल पहुंचाया जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी।
