5 दिसंबर आज से पौष माह आरम्भ, धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ, पर इन 5 कार्यों से बनाकर रखे दूरी नहीं तो होगा नुकसान,,,,,

हरिद्वार: आज से हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास का आरम्भ हो चुका है। यह माह धार्मिक, आध्यात्मिक और तप–साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पौष मास में सूर्य देव की विशेष पूजा का विधान है और माना जाता है कि इस अवधि में किए गए दान, जप, तप, ब्रह्मचर्य और सत्संग का फल कई गुणा बढ़ जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना देवताओं का दिन माना जाता है और इसी काल में सूर्य देव अपनी तेजस्विता को चरम पर पहुंचाते हैं। माना जाता है कि इस माह में संयम, सरलता और सात्त्विक जीवन शैली से जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।
🏵️ पौष माह में इन 5 कार्यों से जरूर बचें🏵️
🔴 कटु वचन और क्रोध
पौष महीने में गुस्सा करना अत्यंत अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस माह में किसी को अपशब्द या कठोर वाणी बोलने से घर में कलह और मानसिक तनाव बढ़ता है।
🔴 नकारात्मक विचार और आलस्य
यह मास साधना और कर्म का प्रतीक है। अत्यधिक नींद, आलस्य और कामचोरी जीवन में रुकावटें और असंतोष पैदा करती हैं।
🔴 तामसिक भोजन और मद्यपान
इस अवधि में मांसाहार, नशा और अत्यधिक मसालेदार भोजन स्वास्थ्य और ऊर्जा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इस माह में सात्त्विक भोजन का विशेष महत्व है।
🔴 झूठ बोलना और छल
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस महीने में छल-कपट, झूठ और अन्याय करने से पापकर्मों में वृद्धि होती है और पुण्य नष्ट हो जाता है।.
🔴 बिना आवश्यकता खर्च और विलासिता
यह काल संयम और तपस्या का माना जाता है। इसलिए अत्यधिक धन व्यय, विलासिता और दिखावा करने से ग्रह दोष बढ़ सकते हैं।
🏵️ पौष माह में क्या करें?🏵️
🟢 सूर्य देव को अर्घ्य दें
🟢 तिल और गुड़ का दान करें
🟢 श्री विष्णु और सूर्य देव का मंत्र जाप करें
🟢 स्वच्छता और सात्त्विकता बनाए रखें
🟢साधना, पाठ, योग और ध्यान करें
🏵️ धार्मिक मान्यता 🏵️
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार जो व्यक्ति पौष माह में संयम, पूजा और दान करते हुए सद्कर्म करता है, उसके जीवन में स्वास्थ्य, सम्मान और समृद्धि का वास होता है और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
