उत्तराखंड मे यहाँ प्रशासन ने की सख्त कार्यवाही, ऋषिकेश सब रजिस्ट्रार ऑफिस में अचानक पड़े छापे से मचा हड़कंप,,,,,

ऋषिकेश: ऋषिकेश के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिलाधिकारी सविन बंसल ने अचानक औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय की कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताएं, नियमों की खुली अवहेलना और अव्यवस्था सामने आई, जिसने पूरे प्रशासन को चौंका दिया। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस स्तर की लापरवाही और गैरकानूनी कामकाज को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई तय है।
🔴 सब रजिस्ट्रार गैरहाजिर, लिपिक कर रहा था अवैध निबंधन
निरीक्षण में सबसे गंभीर मामला तब सामने आया, जब पाया गया कि सब रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में एक लिपिक संपत्ति के विलेखों का निबंधन कर रहा था। यह पूरी प्रक्रिया कानून के खिलाफ थी। जब डीएम ने 47 ए के तहत संपत्ति मूल्यांकन को लेकर सवाल किए, तो संबंधित कर्मचारी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
🔴 औद्योगिक भूमि की आवासीय दरों पर रजिस्ट्री, करोड़ों की स्टांप चोरी की आशंका।
जांच में कई ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें औद्योगिक क्षेत्र की जमीन को छोटे हिस्सों में विभाजित कर आवासीय दरों पर रजिस्ट्री की गई थी। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता मानी जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। डीएम ने इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तुरंत प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
🔴 फर्जी कर्मचारी का खुलासा, रिकॉर्ड में कोई नाम नहीं
औचक निरीक्षण के दौरान एक ऐसा कर्मचारी भी मिला, जिसके पास न तो नियुक्ति से जुड़ा कोई दस्तावेज था और न ही उसकी उपस्थिति कार्यालय रिकॉर्ड में दर्ज थी। इस पर जिलाधिकारी ने सभी कार्मिकों का पूरा रिकॉर्ड तलब कर जांच के आदेश दिए।
🔴 संदिग्ध डेटाबेस पर काम, कंप्यूटर और दस्तावेज जब्त
कार्यालय में पुराने और संदिग्ध डिजिटल डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसके संबंध में कोई वैध कारण नहीं बताया जा सका। डीएम ने संदिग्ध और कूटरचित विलेखों के साथ कार्यालय का कंप्यूटर भी जब्त कर तहसील प्रशासन के हवाले कर दिया।
🔴 मूल विलेख महीनों से लंबित, उपभोक्ता परेशान
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि तय समय सीमा के बावजूद सैकड़ों मूल दस्तावेज छह महीने से अधिक समय से लंबित पड़े थे। कई महत्वपूर्ण अभिलेख अलमारियों में धूल खा रहे थे, जबकि फरियादी महीनों से अपने कागजात और रजिस्ट्री की प्रतिलिपि के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहे थे।
रजिस्ट्री नकल में भारी देरी, नियम सिर्फ कागजों तक
अर्जेंट श्रेणी की रजिस्ट्री नकल, जिसे 24 घंटे में उपलब्ध कराया जाना चाहिए, कई मामलों में महीनों甚至 वर्षों से लंबित पाई गई। इससे साफ हुआ कि कार्यालय की कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार और मनमानी से प्रभावित है।
🔴 समय पर खुला दफ्तर, काम शुरू करने में घंटों की देरी
हालांकि कार्यालय निर्धारित समय पर खुल गया था, लेकिन पहली रजिस्ट्री देर से शुरू की गई। इस देरी को लेकर जब डीएम ने कर्मचारियों से सवाल किया, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका।
🔴 फरियादियों ने खोली पोल
निरीक्षण के दौरान मौजूद आम नागरिकों ने भी अपनी परेशानियां डीएम के सामने रखीं। लोगों ने मूल दस्तावेज न मिलने, अनावश्यक देरी और अवैध वसूली के आरोप लगाए। इस पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
🔴 डीएम का सख्त संदेश
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जनहित से जुड़े विभागों में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।
